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    Home » इतिहासकार डॉ. राम शरण शर्मा की जयंती मनाई गई ।
    Breaking News बिहार

    इतिहासकार डॉ. राम शरण शर्मा की जयंती मनाई गई ।

    Devanand SinghBy Devanand SinghNovember 27, 2024No Comments2 Mins Read
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    इतिहासकार डॉ. राम शरण शर्मा की जयंती मनाई गई ।
    राष्ट्र संवाद ( ब्यूरो चीफ) बेगूसराय अशोक कुमार ठाकुर

    बेगूसराय। बरौनी रिफाइनरी टाउनशिप बेगूसराय अवस्थित सूरज भवन में मंगलवार को विश्व प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. राम शरण शर्मा की जयंती के अवसर पर जनपद के इतिहासकार और प्रगतिशील लोगों की उपस्थिति में समारोह सम्पन्न हुआ। अध्यक्षता जीडी काॅलेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र साह एवं संचालन जलेस के राज्य सचिव कुमार विनिताभ ने किया। प्रत्यक्ष गवाह के संपादक पुष्कर प्रसाद सिंह ने डॉ. रामशरण शर्मा का, द्वन्दात्मक इतिहास दूंगा/शोषित पीड़ित मजबूरों को, संघर्ष का अहसास दूंगा/जाति-धर्म की हर राजनीति को, काटने के वास्ते/ तुम हमें “विश्वास” दे दो, मैं “उन्मुक्त आकाश” दूंगा जैसी धारदार पंक्तियों से शुरूआत कर अतिथियों का स्वागत किया और धन्यवाद ज्ञापन मजदूर नेता व साहित्यकार ललन लालित्य ने किया।

     

    डॉ. राम शरण शर्मा ने संस्कृति को कृषि संस्कृति के रूप में प्रमाणित किया।
    मुख्य अतिथि इतिहासकार प्रो फुलेश्वर सिंह ने कहा कि डॉ. राम शरण शर्मा की सबसे बड़ी ऐतिहासिक खोज रही है कि उन्होंने भारतीय संस्कृति को कृषि संस्कृति के रूप में प्रमाणित किया है‌। उन्होंने इस बात को प्रकाशित किया कि किस तरह साम्प्रदायिक शक्ति कृषि संस्कृति को झुठलाने और समाप्त करने के लिए उसपर देव संस्कृति को लादा जा रहा है।

     

    चैतन्य मित्र ने कहा कि डॉ. राम शरण शर्मा विश्व स्तर के इतिहासकार जरूर थे लेकिन यहां के लोग उतनी तत्परता से खड़े नहीं हुए जितनी आवश्यकता थी। उन्हें व्यापक पैमाने पर सामाजिक व राजनीतिक दंश झेलना पड़ा। वे कभी भी विसंगतियों के साथ समझौता नहीं किया। यही वजह है कि उनके पुस्तकों पर प्रतिबंध भी लगा।
    जन संस्कृति मंच के दीपक सिन्हा ने कहा कि डॉ. रामशरण शर्मा एक खोजी इतिहासकार थे। उन्होंने इतिहास को धार्मिक आधार पर नहीं अपितु वैज्ञानिक तरीके से लिखा। इस अवसर पर जीडी काॅलेज के हिन्दी प्राध्यापक डॉ. अभिषेक कुंदन ने कहा कि इतिहासकार राम शरण शर्मा जनता के वास्तविक इतिहासकार थे। वे वैचारिक रूप से शोषित वर्ग के हिमायती थे।

     

    इस समारोह में डॉ. चन्द्रशेखर चौरसिया, प्रो जिकरुल्लाह खान, मोहन मुरारी, शंकर मोची, रत्नेश झा, सूर्य नारायण रजक, डॉ. शगुफ्ता ताजवर, अभिनंदन झा, रवि रंजन, कृष्ण कुमार सिंह, संजीव फिरोज, रामानंद सागर, कमल वत्स आदि ने संबोधित किया।

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