स्वामी सहजानंद सरस्वती भवन की जमीन अतिक्रमण को लेकर मुखर हुआ ब्रह्मर्षि समाज मामला पहुंचा थाना
स्वामी सहजानंद सरस्वती भवन की जमीन साथ साथ एक अन्य समाज के जमीन को अतिक्रमण करने के लिए जुस्को द्वारा मजदूर लगाया गया ब्रह्मर्षि समाज के साथ साथ एक अन्य समाज के लोग एकत्रित हो गए देखते ही देखते समाज के प्रबुद्ध लोग पहुंच कर जुस्को का विरोध शुरू किया
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ब्रह्मर्षि विकास मंच के अध्यक्ष विकास सिंह ने खुद संभाला मोर्चा और जुस्को के पदाधिकारियों को खूब खरी-खोटी सुनाई इसके साथ साथ पूरे मामले की जानकारी देने समर्थकों के साथ कदमा थाना पहुंचे थाना प्रभारी ने आश्वासन दिया कि उक्त भूखंड पर अब कोई घेराबंदी नहीं होगी मंच के अध्यक्ष विकास सिंह ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि टाटा स्टील क्या सही मायने में अपने एथिक्स से भटक गई है उन्होंने सवालिया लहजे में कहा की कैप्टन धनंजय मिश्रा तो इस तरह के अधिकारी नहीं है फिर उन्होंने कैसे गुंडागर्दी करने का आर्डर दिया
ज्ञात हो कि जमशेदपुर के क़दमा क्षेत्र स्थित स्वामी सहजानंद सरस्वती भवन परिसर मे उस वक्त हंगामा मच गया जब जुस्को के द्वारा भवन कों आवंटित जमीन कों सड़क बनाने के नाम पर कब्ज़ा किये जाने लगा, समाज के लोगों ने इसका पुरजोर विरोध किया साथ ही उक्त स्थान से कार्य कों भी बंद करवाया.
इस मामले मे समाज के अध्यक्ष सह समाजसेवी विकास सिंह ने क़दमा थाने मे जुस्को के अधिकारीयों के खिलाफ लिखित शिकायत भी दर्ज करवाई है, बता दे उक्त जमीन कों स्वामी सहजानंद सरस्वती भवन के लिए आवंटित की गई है
और भूमिहार समाज के कई धार्मिक अनुष्ठान भी उक्त परिसर मे ही संपन्न होते हैं, और ठीक इसके बगल मे टाटा कंपनी के फ्लैट भी मौजूद है, शिकायतकर्ता विकास सिंह ने कहा की कंपनी के अधिकारी भवन के बाहर जो सड़क है उसे फ्लैट परिसर के भीतर लेना चाहती है और भवन के परिसर के जमीन पर सड़क बनाना चाहती है, जिसका विरोध सभी कर रहें हैं, इन्होने कहा की कंपनी के कई लोगों ने भवन परिसर मे लोगों के साथ हाथपाई की जिसके खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करवाई गई है साथ ही उनपर कानूनी करवाई की मांग भी की गई है.
पूरे मामले पर जमशेदपुर कदमा के भूमिहार समाज के साथ-साथ अन्य समाज के बुद्धिजीवियों ने भी स्वामी सहजानंद भवन के पास पहुंचकर जुस्को द्वारा की जा रही कार्यों की भर्त्सना की ब्रह्मर्षि समाज के रवी भूषण शर्मा अशोक भारती सियाराम सिंह विकास चंद्रा मिथिलेश कुमार अशोक तिवारी ने कार्यों को रुकवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है
बहरहाल तत्काल तो काम रुक गया है परंतु समाज के बुद्धिजीवियों को स्वामी सहजानंद सरस्वती भवन के निर्माण से लेकर अब तक हुई साजिश पर भी मंथन करने की जरूरत है जुस्को के उच्च अधिकारी के बारे में भी जानकारी लेनी चाहिए जिसने वहां खुलेआम गुंडागर्दी की और उस अधिकारी का एक माननीय के साथ क्या संबंध है इस पर भी विचार करना चाहिए इस पर अगर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो यह तूफान के पहले की खामोशी साबित होगी

