
लेखक: विशेष संवाददाता
जादूगोड़ा के पूर्व उप डाकपाल राजू मांझी की सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत मिली है, जिससे इस हाई-प्रोफाइल मामले में एक नया मोड़ आ गया है। जमशेदपुर में चर्चा का विषय बने इस गबन मामले में अदालत के इस फैसले से बचाव पक्ष को बड़ी राहत मिली है।
सुप्रीम कोर्ट से राजू मांझी को मिली जमानत
जमशेदपुर के जादूगोड़ा डाकघर में 20 लाख रुपये गबन के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसएलपी (crl) केस संख्या: 13511/2026 में पूर्व उप-डाकपाल राजू मांझी का बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्याय मूर्ति उज्जवल भुइंया और न्याय मूर्ति अतुल एस चांदूरकर की डबल बेंच के कोर्ट द्वारा जमानत याचिका मंजूर की गई।
इस मामले में हाई कोर्ट रांची द्वारा पूर्व में दो बार जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। बचाव पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता चयन सरकार एवं अधिवक्ता अरविन्द कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखा। उक्त दोनों अधिवक्ता जमशेदपुर के रहने वाले हैं।
साल 2025 का है पूरा मामला
यह मामला वर्ष 2025 का है। जानकारी के अनुसार, ग्राहकों द्वारा डाकघर में जमा राशि में 20 लाख रुपये गबन का मामला सहायक डाक अधीक्षक राजकिशोर दास ने जादूगोड़ा थाना में दर्ज कराया था।
इस मामले में डाकघर के उप-डाकपाल राजू मांझी की संलिप्तता सामने आयी थी। इसके बाद उन्हें नौकरी से हटा दिया गया था। तत्पश्चात विभाग द्वारा अनुसंधान के बाद उसे फिर से नौकरी में बहाल कर लिया गया था।
अन्य आरोपियों की संलिप्तता
इस मामले में पोस्ट ऑफिस के एक एजेंट कपिलदेव भगत को साइबर थाना की पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था। पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है ताकि वित्तीय अनियमितताओं में शामिल अन्य लोगों बेनकाब किया जा सके।
- घटना का वर्ष: 2025
- कुल गबन राशि: 20 लाख रुपये
- मुख्य आरोपी: राजू मांझी (पूर्व उप डाकपाल)
- शीर्ष अदालत: सुप्रीम कोर्ट
डाक विभाग के भीतर वित्तीय पारदर्शिता और ग्राहकों के पैसों की सुरक्षा को लेकर यह मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। स्थानीय लोगों और ग्राहकों की नजरें अब इस मामले की अगली कानूनी कार्यवाही पर टिकी हुई हैं।

