
लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। झारखंड के जमशेदपुर में स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार विभिन्न स्कूलों और संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि बच्चों और आम नागरिकों को इस बीमारी के प्रति जागरूक किया जा सके।
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में कुष्ठ रोग जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
जमशेदपुर के सुंदरनगर स्थित पीएमश्री कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मेरी दोस्ती तुमसे (एमडीटी) अभियान के 20वें दिन बुधवार को एक महत्वपूर्ण कुष्ठ रोग जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्कूली छात्राओं को कुष्ठ रोग के शुरुआती लक्षणों, उसकी पहचान, जांच और समय पर मिलने वाले उपचार के बारे में विस्तृत जानकारी देना था ताकि समाज से इस बीमारी को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।
कार्यक्रम के दौरान सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल के निर्देशानुसार जिला कुष्ठ परामर्शी डॉ. राजीव लोचन महतो ने विद्यालय की सभी छात्राओं को संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि कुष्ठ रोग किसी भी तरह का कोई अभिशाप नहीं है, बल्कि यह माइकोबैक्टीरियम लेप्रे नामक बैक्टीरिया से होने वाला एक सामान्य संक्रामक रोग है। नियमित एमडीटी दवा के सेवन से यह बीमारी पूरी तरह ठीक हो जाती है। समय रहते इसकी पहचान करने और उचित उपचार शुरू कराने से गंभीर दिव्यांगता से पूरी तरह बचा जा सकता है।
डॉ. राजीव ने छात्राओं को यह भी जानकारी दी कि स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा आगामी एक अप्रैल 2025 से देशभर में कुष्ठ रोग का एक संशोधित और उन्नत उपचार प्रोटोकॉल लागू किया जा रहा है, जिससे मरीजों को और अधिक लाभ मिलेगा। उन्होंने छात्राओं से अपील की कि वे अपने आस-पड़ोस और गांवों में भी लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करें और किसी भी लक्षण के दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दें।
कुष्ठ रोगियों के प्रति भेदभाव को दूर करने की अपील
कार्यक्रम के दौरान एनजेएमएस संस्था के प्रतिनिधि पर्थो भट्टाचार्य ने भी छात्राओं और शिक्षकों को संबोधित किया। उन्होंने सेल्फ केयर यानी खुद की देखभाल के तौर-तरीकों और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के बारे में तकनीकी जानकारी साझा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज में आज भी कुष्ठ रोगियों को लेकर कई प्रकार की भ्रांतियां और सामाजिक भेदभाव फैले हुए हैं, जिन्हें दूर करना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। कुष्ठ रोगियों से किसी भी प्रकार का भेदभाव न करें और उन्हें सम्मान के साथ समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में अपना योगदान दें।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिसर में उपस्थित अतिथियों द्वारा सभी बच्चों के बीच पठन-सामग्री और उपहार वितरित किए गए। बच्चों को कॉपियां, पेन, बिस्कुट और चॉकलेट दिए गए, जिससे छात्राओं के चेहरे पर खुशी और उत्साह साफ देखा जा सकता था। इस आयोजन से विद्यालय की छात्राओं ने कुष्ठ रोग के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं और समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

