लेखक: देवानंद सिंह
भारत की युवा शक्ति देश का सबसे बड़ा संसाधन है, लेकिन जब यही शक्ति नशे के जाल में फंसने लगे तो चिंता केवल परिवारों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि राष्ट्र के भविष्य पर सवाल खड़ा होता है। जमशेदपुर से पूरे झारखंड तक नशे के सिंडिकेट पर प्रहार करने की आवाज बुलंद हो रही है, क्योंकि नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार आज कानून-व्यवस्था, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है।
नशे के सिंडिकेट पर प्रहार: NCORD बैठक में बनी रणनीति
हाल ही में जमशेदपुर में जिला स्तरीय नार्कोटिक्स समन्वय समिति (NCORD) की अहम बैठक हुई, जिसमें नशे के खिलाफ निर्णायक जंग का खाका खींचा गया। बैठक में जिले के चिह्नित 10 हॉटस्पॉट पर निगरानी और कार्रवाई तेज करने पर जोर दिया गया। ये वे संवेदनशील इलाके हैं जहां नशे की खरीद-फरोख्त सबसे ज्यादा होती है और युवा आसानी से इसकी गिरफ्त में आ जाते हैं।
बैठक में पेश आंकड़े चौंकाने वाले हैं। सितंबर माह में ही NDPS अधिनियम के तहत 133 किलोग्राम गांजा और ब्राउन शुगर की 52 पुड़िया जब्त की गईं। ये आंकड़े नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई की अहमियत तो बताते ही हैं, साथ ही यह सवाल भी उठाते हैं कि आखिर नशे की खेप कहां से आती है, इसके पीछे कौन लोग हैं और युवाओं तक इसकी पहुंच रोकने के लिए व्यवस्था को कितना मजबूत बनाया गया है।
आपूर्ति शृंखला और वित्तीय नेटवर्क को तोड़ना ही असली समाधान
नशे के खिलाफ छापेमारी और गिरफ्तारियां जरूरी हैं, लेकिन असली सफलता तब मिलेगी जब बड़े तस्करों, उनके वित्तीय मददगारों, आपूर्ति शृंखला और संगठित गिरोहों पर निर्णायक कार्रवाई होगी। झारखंड की भौगोलिक स्थिति इसे अंतर्राज्यीय तस्करी का कॉरिडोर बनाती है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ की सीमाओं से लगे होने के कारण यहां गांजे की तस्करी सुगम है। पुलिस, खुफिया एजेंसियों, प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना होगा।
अवैध कमाई के स्रोतों की जांच, संदिग्ध वित्तीय लेन-देन पर नजर और कानून के तहत अपराध से अर्जित संपत्ति पर कार्रवाई (पीएमएलए के प्रावधानों का उपयोग) नशे के कारोबार की कमर तोड़ सकती है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के दिशानिर्देशों के अनुरूप वित्तीय जांच को आपराधिक जांच का अभिन्न अंग बनाना होगा, ताकि सफेदपोश संरक्षक भी बेनकाब हों।
जमशेदपुर के युवाओं को बचाने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण
जमशेदपुर जैसे औद्योगिक और शैक्षणिक गतिविधियों वाले शहर में युवाओं को नशे से बचाना विशेष महत्व रखता है। यहां बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर, छात्र और युवा कार्यबल रहते हैं जो तनाव और अकेलेपन के कारण नशे की ओर आकर्षित हो सकते हैं। विद्यालयों, महाविद्यालयों, कोचिंग संस्थानों और बस्तियों में नियमित जागरूकता अभियान चलाने होंगे। अभिभावकों और शिक्षकों को भी बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों—जैसे अचानक गुमसुम रहना, पैसे की मांग बढ़ना, आंखें लाल रहना—के प्रति सजग रहना चाहिए।
पुलिस की कार्रवाई के साथ खेल, कौशल विकास, रोजगार और रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देना भी जरूरी है, ताकि युवा नशे के बजाय अपने भविष्य के निर्माण पर ध्यान दें। ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ (NMBA) के तहत चलाए जा रहे ‘नशा मुक्त ग्राम’ और ‘नशा मुक्त कैंपस’ कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाना होगा।
उपचार और पुनर्वास: संवेदनशीलता के साथ न्याय
यह भी समझना होगा कि नशे की लत से जूझ रहे प्रत्येक व्यक्ति को केवल अपराधी मान लेना समाधान नहीं है। ऐसे लोगों के लिए उपचार, परामर्श और पुनर्वास की सुविधाएं सुलभ होनी चाहिए। झारखंड में नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाने और उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में काम करना होगा। नशे के कारोबार में शामिल अपराधियों के विरुद्ध सख्ती और नशे की गिरफ्त में आए लोगों के प्रति संवेदनशीलता दोनों साथ चलनी चाहिए। तभी ‘नशा मुक्त भारत’ का संकल्प सार्थक होगा।
नागरिक भागीदारी और निरंतर निगरानी से मिलेगी जीत
राज्य सरकार और जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि नशा विरोधी अभियान केवल बैठकों, घोषणाओं और आंकड़ों तक सीमित न रहे। कार्रवाई के परिणामों की नियमित समीक्षा हो और नागरिकों से मिली सूचनाओं पर त्वरित कदम उठाए जाएं। आम लोग मादक पदार्थों की अवैध बिक्री या तस्करी की जानकारी टोल फ्री नंबर 112 अथवा जमशेदपुर पुलिस कंट्रोल रूम के नंबर 0657-2431028 पर दे सकते हैं। सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखने की गारंटी होनी चाहिए।
नशा मुक्त झारखंड का रास्ता नशा माफियाओं पर कठोर प्रहार और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा से होकर गुजरता है। जमशेदपुर से उठने वाली प्रभावी पहल पूरे राज्य के लिए उदाहरण बन सकती है। अब जरूरत है कि प्रशासन की इच्छाशक्ति, पुलिस की सक्रियता और समाज की जनभागीदारी मिलकर नशे के अवैध कारोबार के विरुद्ध ऐसी निर्णायक लड़ाई लड़ें, जिसका असर जमीन पर दिखाई दे। आखिरकार, नशे के सौदागरों से युवाओं को बचाना केवल कानून-व्यवस्था का प्रश्न नहीं, बल्कि झारखंड के सामाजिक और आर्थिक भविष्य की रक्षा का संकल्प है।

