उपायुक्त को अंधेरे में रखकर भूमि माफियाओं के आगे सिक्कों की खनक पर नाच रहे अधिकारी और सीओ?
नगर निगम चुनाव और राष्ट्रपति के कार्यक्रम की व्यस्तता के बीच बंदरबांट! बिरसानगर से गोविंदपुर तक दिनदहाड़े हुआ खेल?
देवानंद सिंह
जमशेदपुर:नगर निगम चुनाव और राष्ट्रपति के प्रस्तावित कार्यक्रम की तैयारियों के बीच शहर में जमीन की बंदरबांट का बड़ा खेल चलने का आरोप सामने आया है! चर्चा है कि उपायुक्त को अंधेरे में रखकर कुछ अधिकारी और अंचलाधिकारी मनोज कुमार (सीओ) भूमि माफियाओं के इशारों पर काम कर रहे हैं? सिक्कों की खनक के आगे नियम-कानून ताक पर रख दिए गए हैं, ऐसी बातें अब खुलेआम कही जा रही हैं!
सूत्रों की मानें तो बिरसानगर से लेकर गोविंदपुर तक सरकारी और विवादित जमीनों पर रात के अंधेरे में शुरू हुआ खेल अब दिन के उजाले में भी जारी है! पहले जहां फाइलें चुपचाप सरकाई जाती थीं, अब खुलेआम जमीन से जुड़े मामलों में ‘सेटिंग’ की चर्चा हो रही है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ भू-माफिया पहले रात के अंधेरे में अधिकारियों से मिलते थे, लेकिन अब दिन में ही दफ्तरों में बैठकर सौदेबाजी कर रहे हैं! सवाल उठ रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में यह सब हो रहा है?
सबसे गंभीर आरोप अंचल कार्यालय से जुड़े मामलों को लेकर है। कहा जा रहा है कि यदि विभाग सिर्फ यह जांच कर ले कि सीओ मनोज कुमार के कार्यकाल के दौरान कितने ‘मोशन’ (भूमि से जुड़े प्रस्ताव/म्यूटेशन/फाइल मूवमेंट) हुए और उनमें किन-किन लोगों की संलिप्तता रही, तो पूरी “रामायण” लिखी जा सकती है! आखिर इतने कम समय में इतनी फाइलें कैसे पास हो गईं? किन आधारों पर जमीन का स्वरूप बदला गया? किन लोगों को लाभ पहुंचाया गया?
शहर में यह भी चर्चा है कि चुनावी व्यस्तता और उच्चस्तरीय कार्यक्रमों की आड़ में जमीन से जुड़े मामलों को तेजी से निपटाया गया? क्या वाकई प्रशासन की प्राथमिकताएं बदली हुई थीं या फिर कुछ लोगों ने हालात का फायदा उठाया?
अब मांग उठ रही है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच हो! उपायुक्त स्वयं मामले की समीक्षा करें और संबंधित अवधि में पारित सभी आदेशों, म्यूटेशन और भूमि परिवर्तन प्रस्तावों की बारीकी से जांच कराई जाए! यदि सब कुछ नियमसम्मत है तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, और यदि गड़बड़ी है तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए!
सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या जमशेदपुर की जमीनों पर माफियाओं का कब्जा प्रशासन की आंखों के सामने हो रहा है? या फिर वाकई किसी को अंधेरे में रखकर यह पूरा खेल खेला जा रहा है?
अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं!

