राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा थाना क्षेत्र में गुर्रा नदी, सुवर्णरेखा नदी, यूसील कॉलोनी शिव मंदिर, ईंटा भट्ठा और इंचड़ा छठ घाटों पर अवैध बालू खनन का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। रात होते ही बालू माफिया सक्रिय हो जाते हैं और अंधेरे का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर खनन व परिवहन करते हैं, जबकि हैरानी की बात यह है कि दिन के उजाले में भी ट्रैक्टर, हाइवा और ट्रकों से बेखौफ बालू उठाव जारी रहता है। जंगलों, स्कूलों के पास और नदी तटों पर अवैध स्टॉक प्वाइंट बनाए गए हैं, जो छापेमारी की भनक लगते ही अचानक खाली कर दिए जाते हैं। बालू की कीमतें भी आसमान छू रही हैं—10 चक्का हाइवा 20-22 हजार, 12 चक्का 28-32 हजार और 16 चक्का 38-44 हजार रुपये में बेचा जा रहा है।
स्थानीय भाजपा नेता ने आरोप लगाया है कि बिना वैध चालान के सैकड़ों हाइवा बालू का भंडारण किया जा रहा है और इसकी शिकायत जिला खनन पदाधिकारी से की गई है। उन्होंने पुलिस और खनन विभाग पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि मोटी रकम लेकर आंखें मूंद ली जाती हैं, जिससे छापेमारी से पहले ही ट्रक सुरक्षित निकल जाते हैं। इस अवैध कारोबार से सुवर्णरेखा नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है, वहीं सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है और सड़कों पर बालू डंपिंग से दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
दुड़कू गांव के ग्रामीणों का कहना है कि रात से भोर तक लगातार ट्रैक्टरों की आवाजाही से उनकी नींद हराम हो गई है। विरोध करने पर बालू माफिया द्वारा धमकियां भी दी जाती हैं। इस मामले की शिकायत पोटका विधायक संजीव सरदार और जादूगोड़ा पुलिस से की गई है। हालांकि पुलिस ने दो ट्रैक्टर जब्त किए थे, लेकिन अवैध कारोबार पर अब तक लगाम नहीं लग सकी है। जिला खनन पदाधिकारी सतीश नायक ने मामले की जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन जमीनी स्तर पर माफियाओं का दबदबा अब भी बरकरार है।

