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    दिल्ली के चुनावी मैदान में दांव पर है कई महिला चेहरों की प्रतिष्ठा

    Devanand SinghBy Devanand SinghFebruary 4, 2025No Comments5 Mins Read
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    दिल्ली के चुनावी मैदान में दांव पर है कई महिला चेहरों की प्रतिष्ठा

    देवानंद सिंह

    दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के शोरगुल के बीच एक खास बात जो सामने आ रही है, वह है महिलाओं की बढ़ती भूमिका और चुनौतीपूर्ण चुनावी परिप्रेक्ष्य में उनकी भागीदारी। 5 फरवरी को होने वाले चुनाव में 70 विधानसभा सीटों पर 699 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाएंगे, जिनमें से 96 महिला उम्मीदवार भी मैदान में हैं। इनमें से कुछ नाम इतने महत्वपूर्ण और चर्चित हैं कि वे न केवल अपने दलों के लिए, बल्कि दिल्ली की राजनीति के लिए भी अहम मोड़ की तरह उभर कर सामने आए हैं।

    दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) की प्रमुख महिला नेता मुख्यमंत्री आतिशी इस बार अपनी ताकत का प्रदर्शन करने के लिए कालकाजी सीट से फिर से चुनावी मैदान में हैं। उनकी स्थिति पार्टी में खास महत्व रखती है, क्योंकि उन्होंने मुख्यमंत्री के तौर पर दिल्ली सरकार की नीति-निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाई है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को आम आदमी पार्टी के चुनाव प्रचार में प्रमुख मुद्दा बनाया गया है और उनके साथ मनीष सिसोदिया का नाम भी जोड़ा जाता है, जिन्होंने दिल्ली के शिक्षा मॉडल को पुनः परिभाषित किया।
    आतिशी का राजनीतिक यात्रा भी उतार-चढ़ाव से भरी रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव में पूर्वी दिल्ली से उम्मीदवार बनने के बाद उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन 2020 के विधानसभा चुनाव में कालकाजी से उनकी जीत ने उन्हें पार्टी में एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया। अब, जबकि वे सीएम पद पर हैं, उनका मुकाबला कांग्रेस की अलका लांबा और बीजेपी की शिखा राय से होगा।

     

    कांग्रेस ने अलका लांबा को आतिशी के खिलाफ मैदान में उतारा है। अलका लांबा का राजनीतिक करियर लगभग तीन दशकों का रहा है और उनका नाम दिल्ली की राजनीति में एक प्रमुख स्थान रखता है। हालांकि, 2014 में उन्होंने आम आदमी पार्टी जॉइन की थी, लेकिन फिर 2019 में कांग्रेस में लौट आईं। लांबा की चुनौती ये है कि उनकी लोकप्रियता में उतार-चढ़ाव रहा है और 2020 में चांदनी चौक सीट पर उन्हें उम्मीद से कहीं कम वोट मिले थे। फिर भी, कांग्रेस की ओर से उनका नाम एक बड़े चुनावी मुकाबले का संकेत देता है, खासतौर पर उनके पास अनुभव और पार्टी के अंदर एक मजबूत आधार है।वहीं, बीजेपी ने शिखा राय को अपने महिला चेहरे के रूप में उतारा है। शिखा राय पेशे से वकील हैं और उन्होंने पिछले चुनावों में दिल्ली के मंत्री सौरभ भारद्वाज के खिलाफ मैदान में उतरने की कोशिश की थी, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। फिर भी, बीजेपी ने उन्हें इस बार फिर से मैदान में उतारा है, जिससे ये स्पष्ट होता है कि बीजेपी दिल्ली में महिलाओं की राजनीति को बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रही है।

     

    आम आदमी पार्टी की नेता राखी बिड़लान भी दिल्ली की राजनीति में महत्वपूर्ण नाम हैं। मंगोलपुरी विधानसभा सीट से शुरू हुआ उनका चुनावी करियर अब मादीपुर विधानसभा सीट तक पहुंच चुका है। 2011 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान अरविंद केजरीवाल के साथ जुड़ी रही राखी बिड़लान को 2015 में मंगोलपुरी से चुनाव जीतने के बाद डिप्टी स्पीकर का पद मिला था। 2020 में उन्होंने तीसरी बार मंगोलपुरी से विधानसभा चुनाव जीता था और अब मादीपुर सीट से अपनी किस्मत आजमा रही हैं। उनका चुनावी सफर इस बात का प्रतीक है कि महिलाओं का राजनीति में सक्रिय होना सिर्फ एक बदलाव की दिशा नहीं, बल्कि सत्ता के केन्द्र में उनका स्थान भी बढ़ रहा है।

    इस सूची में अरीबा ख़ान का नाम भी है, जो कांग्रेस नेता आसिफ़ मोहम्मद ख़ान की बेटी हैं, ओखला विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में हैं। उन्होंने 2022 में पहली बार पार्षद के तौर पर अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी और अब वह आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह ख़ान को चुनौती देने जा रही हैं। इस सीट पर कांग्रेस का युवाओं की ओर रुख़ और नए नेतृत्व को अपनाने का संकेत साफ है। अरीबा की उम्मीदवारी इस बात को प्रमाणित करती है कि दिल्ली की राजनीति में अब युवा महिलाएं अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार हैं।

    दिल्ली विधानसभा चुनाव में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि भारतीय राजनीति में बदलाव की आंधी आ चुकी है। महिलाएं न केवल मतदाता के रूप में महत्वपूर्ण हैं, बल्कि अब वे चुनावी मैदान में भी निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। चाहे आम आदमी पार्टी हो, कांग्रेस हो या बीजेपी, सभी दलों ने महिलाओं को एक मजबूत चेहरा देने की कोशिश की है, जो न केवल उनकी पार्टी को मजबूत बना सके, बल्कि समाज में महिलाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण को भी प्रमुखता दे सके। इस बदलाव का मतलब यह है कि अब राजनीतिक दलों को महिला मतदाताओं के मुद्दों को गंभीरता से लेना होगा, और उनकी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए नए रास्ते खोजने होंगे। दिल्ली में महिलाओं की राजनीति के इस नए दौर की शुरुआत में, उनके मुद्दे, उनकी समस्याएं और उनका दृष्टिकोण हर पार्टी के चुनावी घोषणापत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखेंगे।

    कुल मिलाकर, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में महिलाओं का प्रभावी और निर्णायक रोल न केवल पार्टियों के लिए चुनौती है, बल्कि यह भारतीय राजनीति में महिलाओं के बढ़ते सशक्तिकरण को भी दर्शाता है। आतिशी, अलका लांबा, शिखा राय, राखी बिड़लान और अरीबा ख़ान जैसे नाम यह साबित करते हैं कि महिलाएं अब केवल पार्टी के प्रचार का हिस्सा नहीं, बल्कि चुनावी रणनीतियों और निर्णायक ताकत के रूप में उभर रही हैं। उनके चुनावी संघर्षों और नेतृत्व के जरिए यह साफ हो गया है कि भविष्य में महिलाएं भारतीय राजनीति का अभिन्न हिस्सा बनकर उभरेंगी और उनकी आवाज़ दिल्ली के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों में भी गूंजेगी।

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