लेखक: यदुनंदन
राष्ट्रकवि दिनकर की 118वीं जयंती के अवसर पर सिमरिया में आयोजित समारोह में वक्ताओं ने बच्चों को दिनकर की कविताओं को आत्मसात करने पर जोर दिया।
राष्ट्रकवि दिनकर की 118वीं जयंती समारोह के प्रमुख अंश
बच्चों को दिनकर की कविताओं को आत्मसात करने की जरूरत है।
बीहट।
यदुनंदन।
दिनकर स्मृति विकास समिति सिमरिया के तत्वावधान में राष्ट्रकवि दिनकर की 118वीं जयंती के नौवें दिन सोमवार को दिनकर स्मारक प्लस टू स्कूल, सिमरिया में समारोह का आयोजन किया गया।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए दिनकर पुस्तकालय के कृष्ण कुमार शर्मा ने कहा कि बच्चों को दिनकर की कविताओं को आत्मसात करने की जरूरत है।
कार्यक्रम का संचालन कवि विनोद बिहारी ने किया।
मुख्य वक्ता इतिहासविद् एवं कवि डाॅ. संजय भारद्वाज ने कहा कि दिनकर कवियों के विश्वामित्र हैं।
उन्होंने नए महाभारत के रचनाकार हैं जो मूल स्थापना से अलग है।
उनकी रश्मिरथी ने महाभारत की नई अवधारणा को स्थापित किया।
दिनकर स्मृति विकास समिति के रामनाथ सिंह ने कहा कि दिनकर जी एक महान कवि के साथ-साथ अनुशासित छात्र भी थे जिनसे बच्चों को सीखने की जरूरत है।
प्रत्यक्ष गवाह पत्रिका के संपादक पुष्कर प्रसाद सिंह ने कहा कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर साहित्याकाश के वे सूरज थे जिनकी रोशनी आज दिग्भ्रमित समाज को प्रेरित करती है।
उन्होंने कहा कि दिनकर की कविताओं से भारत भविष्य का निर्माण हो सकता है।
जिले के हर बच्चे दिनकर की कविताओं का अवलोकन करे।
कार्यक्रम में स्वागत भाषण विद्यालय के प्राचार्य कुलदीप सिंह यादव ने किया वहीं धन्यवाद ज्ञापन करते हुए दिनकर पुस्तकालय के अध्यक्ष विश्वंभर सिंह ने कहा कि बच्चों को दिनकर के जीवन से भी सीखने की जरूरत है।
विद्यालय छात्र रमण कुमार, कन्हैया कुमार, आरूषि कुमारी, सृष्टि कुमारी, नयन कुमारी आदि ने दिनकर की कविताओं एवं उनक व्यक्तित्व कृतित्व पर प्रकाश डाला।
मौके पर विद्यालय के शिक्षक सुनील कुमार, लोपा मुद्रा, राजेन्द्र राय नेताजी, प्रवीण प्रियदर्शी, संजीव फिरोज, जितेन्द्र झा, दीनबंधु कुमार, श्यामनंदन निशाकर समेत कई गणमान्य बुद्धिजीवी एवं छात्र-छात्राएं मौजूद थे।
दिनकर का जीवन और साहित्यिक योगदान
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर का जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के बेगूसराय जिले के सिमरिया गांव में हुआ था। उन्हें पद्म भूषण और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी कविताओं में वीर रस, शृंगार रस और सामाजिक चेतना का अद्भुत मिश्रण मिलता है। रश्मिरथी उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति है जिसमें कर्ण के चरित्र को केंद्र में रखकर मानवीय मूल्यों का चित्रण किया गया है। दिनकर ने स्वतंत्रता आंदोलन में भी सक्रिय भाग लिया और उनकी कविताओं ने क्रांतिकारियों को प्रेरित किया।
सिमरिया: दिनकर की जन्मस्थली और स्मृति स्थल
सिमरिया गांव दिनकर की जन्मस्थली होने के साथ-साथ उनकी स्मृति को संजोए रखने का प्रमुख केंद्र है। यहां दिनकर स्मारक प्लस टू स्कूल और दिनकर पुस्तकालय स्थापित हैं जो उनकी विरासत को जीवंत रखते हैं। प्रतिवर्ष दिनकर जयंती पर यहां भव्य आयोजन होते हैं जिनमें साहित्यकार, विद्वान और छात्र भाग लेते हैं। इस वर्ष 118वीं जयंती के नौ दिवसीय समारोह का आयोजन दिनकर स्मृति विकास समिति द्वारा किया गया।
बच्चों के लिए दिनकर की कविताओं का महत्व
वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि दिनकर की कविताएं न केवल साहित्यिक दृष्टि से उत्कृष्ट हैं बल्कि वे चरित्र निर्माण और राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत करने में भी सक्षम हैं। कृष्ण कुमार शर्मा और विश्वंभर सिंह ने विशेष रूप से बच्चों को दिनकर के अनुशासित छात्र जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। छात्रों द्वारा कविता पाठ और व्यक्तित्व कृतित्व पर प्रकाश डालना इस दिशा में सराहनीय पहल है। रामधारी सिंह दिनकर के बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया देखें।

