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    Home » सचिन पायलट को प्रियंका-राहुल ने नहीं दिया मिलने का समय, 6 दिन बाद दिल्‍ली से लौटे बैरंग
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    सचिन पायलट को प्रियंका-राहुल ने नहीं दिया मिलने का समय, 6 दिन बाद दिल्‍ली से लौटे बैरंग

    Devanand SinghBy Devanand SinghJune 17, 2021No Comments2 Mins Read
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    जयपुर. राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच चल रहे सियासी संकट के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है. दरअसल अपनी मांगों को लेकर राजस्थान कांग्रेस से नाराज चल रहे पायलट को दिल्ली में पार्टी की रणनीतिकार प्रियंका गांधी के साथ राहुल गांधी ने मिलने का समय नहीं दिया है.सचिन पायलट शुक्रवार से दिल्ली में डेरा जमाए हुए थे और उनको उम्मीद थी कि पार्टी आलाकमान के साथ प्रियंका गांधी उनसे से मिलेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता. यही नहीं, राजस्‍थान के पूर्व पीसीसी चीफ को ये भी भरोसा था कि पहले उनसे जो वादा किया गया है या फिर उन्होंने जो अपनी मांग रखी है, उसको गंभीरता से लिया जाएगा और समस्या का समाधान होगा. हालांकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. साफ है कि 6 दिनों तक पायलट के दिल्ली में रुकने के बाद भी कोई रास्ता नहीं बन पाया है.
    बता दें कि सचिन पायलट पिछले एक साल से नाराज चल रहे हैं. जबकि उनके समर्थकों का कहना है कि सचिन पायलट राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष थे और उनको देखते हुए जनता ने कांग्रेस के उम्मीदवारों को चुना था. जब सरकार बनी तो पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया और अशोक गहलोत को कमान सौंप दी. वहीं, पूरी दमदारी से लड़ने वाले सचिन को डिप्टी सीएम बनाया गया. वैसे अशोक गहलोत को उनकी कुशल रणनीति और वरिष्ठता को देखते हुए पार्टी ने राजस्थान का सीएम बनाया था.सूत्रों के मुताबिक, पार्टी हाईकमान ने सचिन पायलट को साफ शब्दों में मैसेज दे दिया है कि राजस्थान में अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बने रहेंगे और उन्हीं के नेतृत्व में सब कुछ होगा. हालांकि पायलट भविष्य के बड़े नेता हैं और उन्हें आगे मुख्यमंत्री बनने का मौका मिलेगा. यही नहीं, पार्टी को जब भी मौका मिला तो मंत्रिमंडल में या फिर संगठन में सचिन पायलट को पद दिया गया, लेकिन फिलहाल उन्हें इंतजार करना चाहिए.बहरहाल, राजस्थान कांग्रेस में चल रही गुटबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है अब अंजाम क्या होगा यह देखना होगा.
    फिलहाल सचिन पायलट यही चाहते हैं कि मंत्रिमंडल का विस्तार हो. सरकार में 9 मंत्री के पद खाली हैं और उनके समर्थक विधायकों को मंत्रिमंडल में और सरकारी नियुक्ति में जगह दी जाए, लेकिन ऐसा होता संभव नहीं दिख रहा है. अब बड़ा सवाल यह है कि अगर सचिन पायलट की मांगे पूरी नहीं होती हैं तो वो क्या करेंगे.

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