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    Home » प्रधानमंत्री मोदी का संकल्प: हिंद महासागर को अवसरों का महासागर बनाना
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    प्रधानमंत्री मोदी का संकल्प: हिंद महासागर को अवसरों का महासागर बनाना

    Devanand SinghBy Devanand SinghJune 29, 2026No Comments4 Mins Read
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    हिंद महासागर को अवसरों का महासागर बनाना
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    विक्टोरिया (सेशेल्स), 28 जून (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि भारत ऐसे हिंद महासागर की परिकल्पना करता है, जहां समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक समृद्धि भी सुनिश्चित हो और जहां साझेदारी का आधार देशों का आकार नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और विश्वास हो। इस दूरदर्शी पहल का मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर को अवसरों का महासागर बनाना है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता और विकास को नई दिशा मिल सके। यह भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति और ‘सागर’ (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) विजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘‘हमारा उद्देश्य हिंद महासागर को अवसरों का महासागर बनाना है।’’ यह बयान भारत की समुद्री रणनीति और क्षेत्रीय सहयोग के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। दोनों नेताओं ने इस महत्वपूर्ण बैठक में द्विपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं की गहन समीक्षा की और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर व्यापक विचारों का आदान-प्रदान किया। इस वार्ता ने दोनों देशों के बीच संबंधों को और सुदृढ़ करने का मार्ग प्रशस्त किया है।

    भारत का विजन: हिंद महासागर को अवसरों का महासागर बनाना

    शनिवार को तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर सेशेल्स पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि, ‘‘हम मानते हैं कि हिंद महासागर हमारा साझा घर है। इसकी सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि हमारी साझा जिम्मेदारी है।’’ यह दृष्टिकोण साझा स्वामित्व और सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांत पर आधारित है, जो क्षेत्र के सभी देशों के लिए शांति और प्रगति सुनिश्चित करता है। भारत समुद्री क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, जिसमें समुद्री डकैती से मुकाबला, आपदा राहत कार्य और गैर-राज्य अभिकर्ताओं से खतरों का सामना करना शामिल है।

    आर्थिक सहयोग और कनेक्टिविटी का सुदृढीकरण

    प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को अधिक मजबूत और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने पर भी विस्तृत चर्चा हुई। भारत और सेशेल्स, ब्लू इकोनॉमी, पर्यटन, मत्स्य पालन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में असीमित संभावनाएं साझा करते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हम दोनों देशों के उद्योगों के लिए नए अवसरों की तलाश जारी रखेंगे। भारत और सेशेल्स के बीच संपर्क को और बेहतर बनाने के लिए भी काम किया जाएगा।’’ इसमें हवाई और समुद्री संपर्क को बढ़ावा देना, डिजिटल कनेक्टिविटी में सुधार करना और लोगों से लोगों के बीच आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाना शामिल है। इससे व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा मिलेगा।

    इससे पहले, राष्ट्रपति हर्मिनी ने स्टेट हाउस में प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। यह स्वागत दोनों देशों के बीच गहरे सम्मान और दोस्ती का प्रतीक था। भारत और सेशेल्स के बीच लंबे समय से मजबूत साझेदारी रही है, जिसकी नींव साझा ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोगों के बीच परस्पर संबंधों पर आधारित है। दोनों देशों के नागरिक सदियों से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, जिससे यह साझेदारी और भी खास बन जाती है।

    ‘विजन महासागर’ और ‘ग्लोबल साउथ’ में सेशेल्स की भूमिका

    हिंद महासागर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी के रूप में सेशेल्स, भारत के ‘विजन महासागर’ (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र प्रगति) तथा ‘ग्लोबल साउथ’ के प्रति भारत की प्रतिबद्धता में विशेष स्थान रखता है। सेशेल्स की रणनीतिक स्थिति भारत के लिए समुद्री डोमेन जागरूकता और क्षेत्रीय सुरक्षा वास्तुकला को मजबूत करने में महत्वपूर्ण है। ‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है, और भारत इन देशों के विकास और संप्रभुता का प्रबल समर्थक रहा है।

    भारत का मानना है कि हिंद महासागर की स्थिरता और सुरक्षा, न केवल तटीय राज्यों के लिए बल्कि वैश्विक व्यापार मार्गों के लिए भी आवश्यक है। इस संदर्भ में, भारत अपनी नौसेना क्षमताओं को मजबूत करने और क्षेत्रीय भागीदारों के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में सभी के लिए नेविगेशन की स्वतंत्रता बनी रहे। विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर भारत की विदेश नीति और क्षेत्रीय संबंधों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

    भारत और सेशेल्स के बीच सैन्य सहयोग भी एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिसमें संयुक्त अभ्यास और क्षमता निर्माण शामिल है। यह सहयोग समुद्री सुरक्षा चुनौतियों का सामूहिक रूप से सामना करने के लिए आवश्यक है। भारत सेशेल्स को रक्षा उपकरणों और प्रशिक्षण सहायता भी प्रदान करता रहा है, जिससे उसकी अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूती मिली है।

    अंततः, भारत का संकल्प हिंद महासागर को अवसरों का महासागर बनाना सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक व्यापक रणनीति है जो सुरक्षा, समृद्धि और सतत विकास के तीन स्तंभों पर खड़ी है। यह न केवल भारत और सेशेल्स जैसे देशों के बीच संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग और विश्वास का एक नया युग भी शुरू करेगा। क्षेत्रीय स्थिरता और विकास के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है। [INTERNAL_LINK_HOLDER]

    भारत-सेशेल्स संबंध सागर विजन सेशेल्स हिंद महासागर
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