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    Home » बिरसानगर भूमि माफिया: सीओ मनोज कुमार की भूमिका पर उठे सवाल
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    बिरसानगर भूमि माफिया: सीओ मनोज कुमार की भूमिका पर उठे सवाल

    Devanand SinghBy Devanand SinghMarch 15, 2026Updated:March 15, 2026No Comments4 Mins Read
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    बिरसानगर क्षेत्र में भूमि माफिया, पदाधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण का कथित “कॉकटेल” सक्रिय?

    बिरसानगर भूमि माफिया प्रकरण फिर सुर्खियों में, सीओ की भूमिका और कार्रवाई पर उठे सवाल

    देवानंद सिंह
    जमशेदपुर: शहर में एक बार फिर भूमि माफिया का मामला चर्चा में आ गया है। ‘राष्ट्र संवाद’ ने इस पूरे प्रकरण को लेकर अपनी पड़ताल तेज कर दी है और बिरसानगर क्षेत्र में जमीन से जुड़े कई गंभीर सवाल उठाए हैं। बताया जा रहा है कि जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की चुनावी व्यस्तता के कारण कुछ समय के लिए इस मुद्दे पर विराम लग गया था, लेकिन अब इसे फिर से प्रमुखता से उठाया जा रहा है।
    रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि बिरसानगर क्षेत्र में भूमि माफिया, कुछ पदाधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण का कथित “कॉकटेल” सक्रिय है, जिसके कारण अवैध तरीके से जमीन की खरीद-बिक्री और बाउंड्री कराई जा रही है। चर्चा यह भी है कि इस पूरे मामले में जमशेदपुर के अंचल अधिकारी (सीओ) मनोज कुमार की भूमिका को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
    स्थानीय लोगों का कहना है कि सीओ के पास लिखित शिकायत दिए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि विवादित जमीनों पर लगातार बाउंड्री कराने का काम जारी है। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते कार्रवाई की जाती तो अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जा सकती थी।
    यह भी चर्चा है कि बिरसानगर क्षेत्र में भूमि से जुड़े कुछ पुराने विवाद और अधिवक्ता हत्याकांड से जुड़े मामले भी फिर से सुर्खियों में आ सकते हैं। यदि इन मामलों की निष्पक्ष जांच होती है तो कई अहम तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
    सूत्रों के अनुसार आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि कुछ मामलों में उपायुक्त को पूरी तरह अंधेरे में रखकर जमीन के सौदों को अंजाम दिया जा रहा है और हर दिन लाखों रुपये का लेन-देन हो रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक पदाधिकारियों की चुप्पी को लेकर भी लोगों के बीच कई सवाल उठ रहे हैं।
    हालांकि इन आरोपों पर अब तक संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यदि प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराता है तो सच्चाई सामने आ सकती है और जनता का भरोसा भी मजबूत होगा।
    फिलहाल ‘राष्ट्र संवाद’ ने संकेत दिया है कि भूमि माफिया से जुड़े इस पूरे मामले की पड़ताल आगे भी जारी रहेगी और आने वाले दिनों में इससे जुड़े अन्य पहलुओं को भी सामने लाया जाएगा।अब यह जानने का समय आ गया है कि कौन है को मनोज कुमार

     

    बड़ा सवाल : बिरसानगर की जमीन पर कार्रवाई क्यों थमी?

    बिरसानगर में भूमि विवाद और अतिक्रमण के मामलों को लेकर अब कई गंभीर सवाल उठने लगे हैं। खासकर अंचल अधिकारी (सीओ) मनोज कुमार के कार्यकाल को लेकर स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों के बीच चर्चा तेज हो गई है।
    सबसे बड़ा सवाल यह है कि मनोज कुमार के कार्यकाल में अब तक जमीन से जुड़े कितने मामलों का निष्पादन (मोशन) हुआ, कितने मामले अभी भी लंबित हैं और कितनी शिकायतें दर्ज हुईं? साथ ही यह भी पूछा जा रहा है कि दर्ज शिकायतों में से किन मामलों में वास्तविक कार्रवाई हुई और किन मामलों को फाइलों में ही दबा दिया गया।
    स्थानीय लोगों का कहना है कि बिरसानगर क्षेत्र में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और अवैध बाउंड्री के कई मामले सामने आए, जिनकी शिकायतें लिखित रूप से प्रशासन तक पहुंचाई गईं। इसके बावजूद कई जगहों पर अब भी लगातार बाउंड्री और निर्माण का काम जारी है, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
    एक और बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि जब सीओ मनोज कुमार स्वयं बिरसानगर पहुंचकर सरकारी जमीन को चिन्हित कर चुके थे, तो उसके बाद अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई। यदि जमीन सरकारी है तो अतिक्रमण हटाने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने में देरी क्यों हो रही है?
    इन सवालों को लेकर अब लोगों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। आम लोगों का कहना है कि यदि इन मामलों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए तो पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने आ सकती है।

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