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    जानें प्रधानमंत्री मोदी से वैज्ञानिकों ने क्या कहा

    News DeskBy News DeskJanuary 14, 2025No Comments5 Mins Read
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    भूकंप के लिए चेतावनी प्रणाली विकसित करने की जरूरत: प्रधानमंत्री मोदी ने वैज्ञानिकों से कहा

    नयी दिल्ली, 14 जनवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को वैज्ञानिकों से भूकंप के लिए चेतावनी प्रणाली विकसित करने की दिशा में काम करने का आग्रह करते हुए कहा कि मौसम के उन्नत पूर्वानुमानों ने चक्रवात के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान को काफी कम किया है।

    भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के 150 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने संस्थान की सराहना करते हुए इसे भारत की वैज्ञानिक यात्रा का प्रतीक बताया।

    मोदी ने इस बात का जिक्र किया कि किस तरह उन्नत मौसम पूर्वानुमान से चक्रवातों के दौरान होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी और आर्थिक नुकसान में कमी आई, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा और आर्थिक लचीलापन बना।

    प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मौसम विज्ञान किसी भी देश की आपदा प्रबंधन क्षमता के लिए सबसे महत्वपूर्ण समर्थन प्रदान करता है। प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए, हमें मौसम विज्ञान की दक्षता को अधिकतम करने की आवश्यकता है।’’

    उन्होंने याद किया कि कैसे 1998 में गुजरात के कांडला में चक्रवात और 1999 के ओडिशा सुपर चक्रवात ने हजारों लोगों की जान ले ली थी। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन बेहतर पूर्वानुमान के कारण जानमाल का नुकसान अब कम से कम है।’’

    जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग में सोमवार को 6.5 किलोमीटर लंबी सुरंग का उद्घाटन करने के अपने दौरे का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि आईएमडी ने सुझाव दिया था कि उद्घाटन समारोह 13 जनवरी को आयोजित किया जाए क्योंकि बर्फ से ढके सोनमर्ग में मौसम साफ रहता है।

    इस अवसर पर मोदी ने देश को प्रत्‍येक मौसम और जलवायु का सामना करने के लिए ‘स्मार्ट राष्ट्र’ बनाने के मकसद से ‘मिशन मौसम’ की शुरुआत की।

    मोदी ने कहा कि हर तरह की जलवायु का सामना करने के लिए भारत एक ‘स्मार्ट राष्ट्र’ बने, इसके लिए हमने ‘मिशन मौसम’ शुरू किया है।

    उन्होंने कहा, ‘‘मिशन मौसम टिकाऊ भविष्य और भविष्य की तैयारियों को लेकर भारत की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है।’’

    ‘मिशन मौसम’ का लक्ष्य अत्याधुनिक मौसम निगरानी तकनीक और सिस्टम विकसित करके, उच्च-रिज़ॉल्यूशन वायुमंडलीय अवलोकन, अगली पीढ़ी के रडार और उपग्रहों एवं उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटरों का इस्तेमाल करते हुए उच्‍च स्‍तरीय क्षमता को हासिल करना है।

    यह मौसम और जलवायु प्रक्रियाओं की समझ को बेहतर बनाने, वायु गुणवत्ता डेटा प्रदान करने पर भी ध्यान केंद्रित करेगा जो लंबे समय में मौसम प्रबंधन और हस्तक्षेप की रणनीति बनाने में सहायता प्रदान करेगा।

    उन्होंने कहा कि विज्ञान में प्रगति और इसकी पूरी क्षमता का उपयोग देश की वैश्विक प्रतिष्ठा को आकार देने के लिए आधारशिला के रूप में काम करता है।

    मोदी ने कहा, ‘‘भूकंप के लिए चेतावनी प्रणाली विकसित करने की जरूरत है और वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं को इस दिशा में काम करना चाहिए।’’

    प्रधानमंत्री ने मौसम के तरीकों को समझने में विशेषज्ञता के भारत के समृद्ध इतिहास को रेखांकित करने के लिए शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों का हवाला दिया।

    उन्होंने कहा कि हमारे यहां वेदों, संहिताओं और सूर्य सिद्धान्त जैसे ज्योतिषीय ग्रन्थों में मौसम विज्ञान पर बहुत काम हुआ था।

    मोदी ने कहा कि तमिलनाडु के संगम साहित्य और उत्तर में घाघ भड्डरी के लोक साहित्य में भी बहुत सी जानकारी उपलब्ध है।

    उन्होंने कहा कि कृषि पाराशर, पाराशर रूचि और वृहत संहिता जैसे ग्रन्थों में बादलों के निर्माण और उनके प्रकार तक, उस पर गहरा अध्ययन मिलता है।

    प्रधानमंत्री ने ‘प्री-मॉडर्न कच्छी नैवीगेशन टेक्निक्स एंड वॉयेज’ पुस्तक का भी जिक्र किया जिसमें गुजरात के नाविकों के बारे में सदियों पुराने समुद्री ज्ञान को प्रलेखित किया गया है।

    मोदी ने कहा कि आईएमडी के मौसम पूर्वानुमान जैसे-जैसे अधिक सटीक होंगे, विभिन्न क्षेत्रों, उद्योगों और यहां तक कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी उनका महत्व बढ़ेगा।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि मौसम विज्ञान प्रौद्योगिकी में प्रगति के कारण भारत की आपदा प्रबंधन क्षमताओं में काफी सुधार हुआ है जो न केवल देश के लिए बल्कि वैश्विक समुदाय के लिए भी फायदेमंद साबित हुई है।

    मोदी ने कहा, ‘‘आज, हमारी बाढ़ मार्गदर्शन प्रणाली नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका सहित पड़ोसी देशों को भी सूचनाएं दे रही है।’’

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत किसी भी आपदा से प्रभावित अपने पड़ोसी देशों को मदद की पेशकश करने वाला पहला राष्ट्र बनकर उभरा है।

    राष्ट्रीय राजधानी स्थित भारत मंडपम में आयोजित समारोह में शिरकत करते हुए प्रधानमंत्री ने आईएमडी के 150वें स्थापना दिवस पर एक स्मारक सिक्का और मौसम संबंधी अनुकूलता और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन के लिए आईएमडी विज़न-2047 दस्तावेज़ भी जारी किया। इसमें मौसम पूर्वानुमान, मौसम प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन शमन की योजनाएं शामिल हैं।

    इससे पहले, प्रधानमंत्री ने भारत मंडपम में आईएमडी की उपलब्धियों पर आधारित एक प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

    प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘आज हम भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी के 150 वर्ष का जश्न मना रहे हैं। यह केवल भारतीय मौसम विभाग की यात्रा नहीं है, यह हमारे भारत में आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भी यात्रा है।’’

    उन्होंने कहा कि आईएमडी ने न केवल करोड़ों भारतीयों की सेवा की है, बल्कि भारत की वैज्ञानिक यात्रा का भी प्रतीक बना है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि वैज्ञानिक संस्थाओं में शोध और नवोन्मेष नए भारत के मिजाज का हिस्सा है।

    उन्होंने कहा, ‘‘इसीलिए, पिछले 10 वर्षों में आईएमडी की अवसंरचना और प्रौद्योगिकी का भी अभूतपूर्व विस्तार हुआ है।’’

    समारोह में विश्व मौसम विज्ञान विभाग की महासचिव सेलेस्टे साउलो, पृथ्वी विज्ञान मंत्री जितेंद्र सिंह, पृथ्वी विज्ञान सचिव एम रविचंद्रन, आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र और कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

    आईएमडी के 150वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में, पिछले 150 वर्षों के दौरान आईएमडी की उपलब्धियों, भारत को जलवायु-अनुकूल बनाने में इसकी भूमिका तथा विभिन्न मौसम और जलवायु सेवाएं प्रदान करने में सरकारी संस्थानों द्वारा निभाई गई भूमिका को प्रदर्शित करने के लिए भारत मंडपम सहित देश भर के कई स्थानों पर कार्यक्रमों, गतिविधियों और कार्यशालाओं की एक श्रृंखला आयोजित की गई है।

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