गिरिडीह 20 जून को होनी थी शादी, 8 दिन पहले प्रेमी संग भागी बेटी; आहत पिता ने राजदह धाम में जीते जी किया पिंडदान
राष्ट्र संवाद संवादाता
समाज, परिवार और बदलते सामाजिक मूल्यों के बीच टकराव की एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में चर्चा छेड़ दी है। कोडरमा जिले के डोमचांच थाना क्षेत्र के एक पिता ने अपनी जीवित बेटी का प्रतीकात्मक पिंडदान कर दिया। यह घटना सरिया स्थित प्रसिद्ध उत्तरवाहिनी तट राजदह धाम में हुई, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीणों और परिजनों की मौजूदगी में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया गया।
जानकारी के अनुसार, पिता ने अपनी बेटी की शादी आगामी 20 जून 2026 को तय की थी। विवाह की तैयारियां अंतिम चरण में थीं। तिलक समारोह हो चुका था और रिश्तेदारों को निमंत्रण भी भेजे जा चुके थे। घर में शादी का माहौल था और परिजन खुशी-खुशी विवाह की तैयारियों में जुटे थे। लेकिन इसी बीच 12 जून की रात युवती अपने प्रेमी के साथ घर छोड़कर चली गई।
परिजनों के अनुसार, युवती के अचानक घर से गायब होने के बाद परिवार ने काफी खोजबीन की। रिश्तेदारों और परिचितों से संपर्क किया गया, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। इस बीच कुछ दिनों बाद सोशल मीडिया पर युवती और उसके प्रेमी का विवाह संबंधी वीडियो सामने आया। वीडियो वायरल होने के बाद परिवार को पता चला कि दोनों ने अपनी मर्जी से विवाह कर लिया है।
शादी की तैयारियों पर फिर गया पानी
पिता ने बताया कि बेटी की शादी के लिए उन्होंने अपनी सामर्थ्य के अनुसार सभी इंतजाम किए थे। रिश्तेदारों को बुलाया गया था, शादी के कार्ड बांटे जा चुके थे और तिलक की रस्म भी पूरी हो चुकी थी। परिवार को उम्मीद थी कि तय तारीख पर बेटी की शादी धूमधाम से होगी, लेकिन उसके इस कदम ने पूरे परिवार को गहरे मानसिक आघात में डाल दिया।
पिता का कहना है कि बेटी के इस फैसले से न केवल उनकी भावनाएं आहत हुई हैं, बल्कि समाज में उनकी प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि जिस बेटी को उन्होंने वर्षों तक प्यार से पाला-पोसा, उसी ने परिवार की इच्छा और सम्मान की अनदेखी करते हुए ऐसा कदम उठाया, जिसे वे स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।
राजदह धाम पहुंचकर किया प्रतीकात्मक पिंडदान
बताया जाता है कि इसी पीड़ा और आक्रोश के बीच पिता ने परिवार के अन्य सदस्यों और गांव-समाज के लोगों के साथ सरिया के प्रसिद्ध राजदह धाम पहुंचकर बेटी का प्रतीकात्मक पिंडदान करने का निर्णय लिया। धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-पाठ और अनुष्ठान कर बेटी को परिवार से अलग मानने की घोषणा की गई।
हिंदू परंपरा में पिंडदान सामान्यतः मृतक की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए किया जाता है। किसी जीवित व्यक्ति का पिंडदान करना अत्यंत दुर्लभ और असामान्य माना जाता है। कई क्षेत्रों में इसे सामाजिक और भावनात्मक रूप से संबंध विच्छेद का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई है।
लोगों की राय बंटी हुई
घटना सामने आने के बाद क्षेत्र में इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग पिता के दर्द और सामाजिक परिस्थितियों को समझते हुए उनके कदम को उचित ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि जब परिवार ने बेटी की शादी तय कर दी थी और सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं, तब इस तरह घर छोड़कर जाना परिवार के लिए बहुत बड़ा झटका है।
वहीं दूसरी ओर समाज का एक वर्ग इस घटना को बदलते सामाजिक परिवेश और युवाओं की स्वतंत्र पसंद से जोड़कर देख रहा है। उनका मानना है कि यदि दोनों बालिग हैं और अपनी इच्छा से विवाह किया है, तो परिवार को समय के साथ इस रिश्ते को स्वीकार करने का प्रयास करना चाहिए। कई लोगों का कहना है कि भावनात्मक आवेश में लिया गया ऐसा निर्णय भविष्य में रिश्तों को और अधिक जटिल बना सकता है।
प्रेम विवाह और पारिवारिक अपेक्षाओं का टकराव
सामाजिक जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रेम विवाह के मामलों में वृद्धि हुई है। शिक्षा, सोशल मीडिया और बदलती जीवनशैली के कारण युवा अपने जीवनसाथी का चयन स्वयं करना चाहते हैं। हालांकि ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में अभी भी पारंपरिक विवाह व्यवस्था मजबूत है, जिसके कारण कई बार युवाओं की व्यक्तिगत पसंद और परिवार की अपेक्षाओं के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में संवाद की कमी अक्सर विवाद को और गंभीर बना देती है। यदि परिवार और बच्चे एक-दूसरे की भावनाओं को समझने का प्रयास करें, तो कई समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है।
राजदह धाम बना चर्चा का केंद्र
इस घटना के बाद राजदह धाम भी चर्चा के केंद्र में आ गया है। उत्तरवाहिनी तट पर स्थित यह धार्मिक स्थल वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां पितृ कर्म और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। लेकिन किसी जीवित संतान का प्रतीकात्मक पिंडदान किए जाने की घटना ने स्थानीय लोगों को भी हैरान कर दिया है।
भावनाओं और परंपराओं के बीच उलझा एक परिवार
फिलहाल यह मामला केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं रह गया है, बल्कि समाज में बदलते रिश्तों, पारिवारिक मूल्यों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर बहस का विषय बन गया है। एक ओर पिता की पीड़ा और सामाजिक दबाव है, तो दूसरी ओर युवती का अपने जीवन का निर्णय स्वयं लेने का अधिकार।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बदलते समय में परंपराओं और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए। फिलहाल पिता द्वारा किया गया प्रतीकात्मक पिंडदान पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग अपने-अपने नजरिए से इस घटना को देख रहे हैं।

