परसुडीह APMC में सरकारी दुकानों-गोदामों के आवंटन पर उठे गंभीर सवाल, जांच की मांग
एक ही गोदाम दो व्यापारियों को देने से लेकर वेयरहाउस तीन लोगों के नाम आवंटित करने तक के आरोप , सुपरवाइजर का कमरा तोड़कर गोदाम बनाने का भी दावा, सचिव बोले मेरे कार्यकाल में कोई आवंटन नहीं हुआ
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर। परसुडीह स्थित कृषि उत्पादन बाजार समिति (APMC) में दुकानों, गोदामों और वेयरहाउस के कथित अनियमित आवंटन को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। व्यापारियों ने सरकारी संपत्तियों के आवंटन में गड़बड़ी, नियमों की अनदेखी और अधिकारियों की कथित मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। मामले में निष्पक्ष जांच, आवंटन संबंधी दस्तावेजों की जांच और वित्तीय ऑडिट कराने की मांग की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
एक ही गोदाम दो व्यापारियों को देने का आरोप
व्यापारियों का आरोप है कि बाजार समिति में एक ही गोदाम नंबर दो अलग-अलग व्यापारियों को आवंटित कर दिया गया, जिससे दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है। आरोप यह भी है कि समिति के सुपरवाइजर के सरकारी कमरे को तोड़कर गोदाम में तब्दील किया गया और बाद में उसे निजी व्यक्ति को आवंटित कर दिया गया।
इसके अलावा, एक अस्थायी या जाली ढांचे को पक्का गोदाम बताकर आवंटित करने तथा एक ही वेयरहाउस को तीन अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर आवंटित किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। इन मामलों में आवंटन आदेश, संपत्ति का वास्तविक स्वरूप और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की जा रही है।
15 से 20 लाख रुपये में गोदाम हस्तांतरण का दावा
कुछ व्यापारियों का दावा है कि बाजार समिति परिसर में गोदामों का कथित तौर पर 15 से 20 लाख रुपये तक में हस्तांतरण किया गया है। उनका कहना है कि कुछ व्यापारियों के पास कथित रूप से 10-10 गोदाम हैं, जिन्हें किराये पर देकर हर महीने एक से डेढ़ लाख रुपये तक की आय अर्जित की जा रही है।
व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में कुछ अधिकारियों की मिलीभगत हो सकती है। हालांकि, कथित लेन-देन, गोदामों के स्वामित्व अथवा आवंटन की वैधता और अधिकारियों की संलिप्तता की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों एवं आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
मंडी शुल्क बंद होने के बाद आवंटन के अधिकार पर सवाल
मामले में यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि राज्य में मंडी शुल्क समाप्त होने के बाद बाजार समिति के पास नए आवंटन का अधिकार किस सीमा तक बचा था। शिकायतकर्ताओं की मांग है कि संबंधित सरकारी आदेश, गजट अधिसूचना, नियमावली और समिति की बैठक के प्रस्ताव सार्वजनिक किए जाएं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित आवंटन किस प्रावधान के तहत किए गए।
व्यापारियों ने मांग की है कि मंडी शुल्क समाप्त होने की तिथि से अब तक आवंटित दुकानों, शेडों, गुमटियों, गोदामों और वेयरहाउस की सूची सार्वजनिक की जाए। साथ ही, आवंटन आदेश, भुगतान की रसीदें, प्राप्त राशि, संबंधित बैठकों के कार्यवृत्त और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति की जांच कराई जाए।
*उपायुक्त से ऑडिट, लोकायुक्त से शिकायत की तैयारी*
शिकायतकर्ताओं की ओर से पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और वित्तीय ऑडिट कराने की मांग की जा रही है। साथ ही, लोकायुक्त एवं सतर्कता विभाग के समक्ष शिकायत करने की तैयारी की बात भी कही गई है।
मांग की गई है कि यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है, तो संबंधित आवंटन की वैधता पर नियमानुसार निर्णय लिया जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए। सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की पुष्टि होने पर नियमानुसार वसूली की कार्रवाई भी की जाए।
सचिव ने कहा मेरे कार्यकाल में नहीं हुआ कोई आवंटन
परसुडीह बाजार समिति के सचिव अभिषेक आनंद ने कहा कि उनके कार्यकाल में एक भी आवंटन नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य कथित गैरकानूनी कार्यों की जांच-पड़ताल की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सचिव के इस बयान के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कथित आवंटन किस अवधि में हुए, उनके लिए किस स्तर पर अनुमति दी गई और संबंधित अभिलेखों में क्या दर्ज है। निष्पक्ष जांच और दस्तावेजों के सत्यापन से ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल, बाजार समिति में कथित अनियमित आवंटन को लेकर उठे सवालों के बीच जिला प्रशासन की जांच पर नजरें टिकी हैं।
*जांच के केंद्र में पांच बड़े सवाल*
1. आवंटन का अधिकार: मंडी शुल्क समाप्त होने के बाद बाजार समिति के पास नए आवंटन का अधिकार था या नहीं? संबंधित सरकारी आदेश क्या कहता है?
2. दोहरे आवंटन का मामला: क्या एक ही गोदाम या वेयरहाउस अलग-अलग व्यक्तियों के नाम आवंटित किया गया? इसके लिए कौन जिम्मेदार है?
3. सरकारी कमरे का उपयोग: क्या सुपरवाइजर के सरकारी कमरे को तोड़कर गोदाम बनाया गया और उसका आवंटन किया गया? क्या इसके लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति ली गई थी?
4. आर्थिक लेन-देन: गोदामों के कथित हस्तांतरण में 15 से 20 लाख रुपये तक के लेन-देन के आरोपों की सच्चाई क्या है? राशि किसे और किस मद में दी गई?
5. अधिकारियों की जवाबदेही: क्या आवंटन से संबंधित बैठक, प्रस्ताव, स्वीकृति और रसीदें उपलब्ध हैं? यदि अनियमितता प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी?
व्यापारियों की मांग: उपायुक्त की निगरानी में निष्पक्ष जांच, सभी आवंटन अभिलेखों का सत्यापन और आवश्यक होने पर वित्तीय ऑडिट कराया जाए।

