
लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
पलाश दीपावली मेले का शुभारंभ जमशेदपुर के उपायुक्त कार्यालय परिसर में किया गया है। इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य स्थानीय उत्पादों, ग्रामीण उद्यमिता और महिला स्वावलंबन को बढ़ावा देना है। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) की ओर से आयोजित यह दो दिवसीय मेला 5 नवंबर को विधिवत रूप से शुरू हुआ। यह मेला 6 और 7 नवंबर तक आम लोगों के लिए खुला रहेगा, जहाँ वे सीधे महिला उद्यमियों के हाथों से बने सामानों की खरीद कर सकते हैं।
पलाश दीपावली मेले का शुभारंभ और महिला उद्यमिता
इस मेले में जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से आई महिला स्वयं सहायता समूहों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। उपायुक्त कार्यालय परिसर में कुल 3 स्टॉल लगाए गए हैं, जो पूरी तरह से स्थानीय और जैविक उत्पादों से भरे हुए हैं। इन स्टॉलों पर महिलाओं द्वारा कड़ी मेहनत से तैयार की गई सामग्री उपलब्ध है। यहाँ बिक्री के लिए अचार, बड़ी, पापड़, रागी के लड्डू, नमकीन, ठेकुआ और मक्के से बने पौष्टिक स्नैक्स रखे गए हैं। इसके अलावा, दीपावली के त्योहार को ध्यान में रखते हुए मिट्टी के दीपक, घर सजाने की झाड़ू और हर्बल उत्पाद भी खरीदारों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
मेले के उद्घाटन के अवसर पर उपायुक्त ने स्थानीय नागरिकों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में मेले में आएं और महिला समूहों द्वारा निर्मित इन स्थानीय एवं जैविक उत्पादों की खरीदारी करें। उन्होंने कहा कि जब हम अपने क्षेत्र की महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों को खरीदते हैं, तो इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलता है, बल्कि महिला उद्यमियों की आय में भी सीधा इजाफा होता है। यह प्रयास उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
ग्रामीण महिलाओं के लिए बेहतर मंच
प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए एक बेहतर मंच उपलब्ध कराना है। कई बार ग्रामीण प्रतिभाएं उचित अवसर न मिलने के कारण पिछड़ जाती हैं, लेकिन इस तरह के आयोजनों से उन्हें अपने हुनर को बाजार तक पहुंचाने का मौका मिलता है। महिला उद्यमिता और उनके आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन भविष्य में भी इस प्रकार के प्रयास जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस मेले में आने वाले ग्राहक न केवल त्योहारों के लिए खरीदारी कर रहे हैं, बल्कि वे सीधे उन महिलाओं के काम को भी देख रहे हैं जो ग्रामीण विकास की रीढ़ हैं। इन स्टॉलों पर उपलब्ध वस्तुएं अपनी शुद्धता और गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं। रागी के लड्डू और पारंपरिक नाश्ते जैसे आइटम स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच काफी पसंद किए जा रहे हैं। दीपावली के अवसर पर इन उत्पादों को खरीदना एक तरह से स्थानीय कारीगरों के प्रति समर्थन दिखाने जैसा है। प्रशासन का यह कदम न केवल व्यापार को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि समाज में महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण बदलने में भी मदद कर रहा है। आने वाले दिनों में और भी ऐसे मेलों का आयोजन किए जाने की संभावना है ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाओं को अपनी आजीविका संवारने का अवसर मिल सके।

