
नाटक के मंचन में जीवंत हुई लोकआस्था और संस्कृति की विरासत को संजोने का एक अभूतपूर्व प्रयास बेगूसराय जिले के तेघड़ा स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय रामपुर में देखने को मिला। हमारी संस्कृति और परंपराएं ही हमारी पहचान हैं और इन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का अनूठा प्रयास शुक्रवार को विद्यालय के प्रांगण में सफल हुआ। धनतेरस के पावन अवसर पर आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
नाटक के मंचन में जीवंत हुई लोकआस्था और संस्कृति की विरासत
विद्यालय के नवम एवं दशम वर्ग के विद्यार्थियों ने नाटक, नृत्य और अभिनय के माध्यम से दीपावली एवं छठ महापर्व की धार्मिक आस्था, लोकपरंपरा और सांस्कृतिक विरासत को मंच पर पूरी तरह जीवंत कर दिया। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को न केवल पर्वों के आध्यात्मिक महत्व से रूबरू कराया, बल्कि सामाजिक संदेश भी दिए।
विद्यार्थियों ने बड़े ही कलात्मक ढंग से आकर्षक रंगोली बनाकर हरित दीपावली का संदेश दिया, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति बच्चों की जागरूकता को दर्शाता है। वहीं, नाट्य मंचन के माध्यम से छठ महापर्व के नहाय-खाय, खरना, अस्ताचलगामी सूर्य को संध्या अर्घ्य और उदीयमान सूर्य को प्रातःकालीन अर्घ्य तक की परंपराओं का सजीव चित्रण किया गया। अभिनय और भावपूर्ण नृत्य के जरिए व्रत की पवित्रता, पारिवारिक समर्पण, सूर्योपासना और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता के भावों को खूबसूरती से प्रदर्शित किया गया।
इस आयोजन में दशम वर्ग से भारती कुमारी, आदर्श कुमार, आदर्श राज एवं केशव ने भाग लिया। वहीं नवम वर्ग से सरस्वती कुमारी, ऋचा कुमारी, प्रतिभा कुमारी, रानी कुमारी और अर्चना कुमारी की भूमिकाएं सराहनीय रहीं। सभी विद्यार्थियों ने अपनी कला से दर्शकों का मन मोह लिया और भारतीय संस्कृति की समृद्धता का परिचय दिया।
शिक्षा और संस्कार का अनूठा मेल
विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजा राय ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं है, बल्कि बच्चों को अपनी जड़ों, संस्कृति, संस्कार और विरासत से जोड़ना भी है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से बच्चे अपनी परंपराओं को न केवल समझते हैं बल्कि उनका सम्मान भी करते हैं।
कार्यक्रम की सफलता में नोडल शिक्षिका प्रतिभा रानी के अलावा कुमारी अर्चना, शिक्षक रजनीश कुमार, मनोज कुमार, विजय कुमार एवं अजय ठाकुर के सामूहिक प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने जिस समर्पण के साथ यह नाटक प्रस्तुत किया, उसने विद्यालय के वातावरण को भक्तिमय बना दिया। तेघड़ा के शैक्षणिक परिवेश में यह आयोजन निश्चित रूप से एक प्रेरणा बनकर उभरा है।
अंत में, विद्यालय प्रशासन ने उपस्थित अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों का आभार व्यक्त किया। ऐसे आयोजनों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियां अपनी सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण रखने का संकल्प लेती हैं। यह मंच केवल नाटक का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि परंपराओं के संरक्षण का एक सार्थक संदेश भी था।

