Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » झारखण्ड की अंगुर है महुआ
    Breaking News जामताड़ा झारखंड

    झारखण्ड की अंगुर है महुआ

    Nizam KhanBy Nizam KhanMay 12, 2023No Comments2 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    झारखण्ड की अंगुर है महुआ।

    विपुल गोस्वामी

    फतेहपुर जामताड़ा, (झारखण्ड)झारखण्ड की अंगुर आदिवासी का जीवन आधार है।कहने का तात्पर्य है कि हरे भरे हरियाली के बीच जिसका जीवन मरन का डोर बंधा हो,फल ,फूल और बृक्ष सदा छाया से लेकर गृह की छत्रछाया तक सभी प्राणी का निस्वार्थ भाव से सेवा करते चला आ रहा है।
    आते है मूल विन्दु पर आखिर वो कौन सा फल है जिसे हम झारखण्डी अंगूर कहते है।वो फल नहीं वल्कि फूल है महुआ। महुआ को हम कच्चा सेवन कर सकते है, सुखा कर भूंज के खाते है।अंगूर से जैसे मदिरा बनाया जाता है।वैसे ही महुआ को भी झारखंडी मदिरा पद्वति के द्वारा मदिरा,मद ,शराब बनाया जाता है।करुना काल मे आदिवासी को प्रभावित नही कर पाया था जिसका मूलत कारण अथक परिश्रम के पश्चात मदिरा का सेवन करने के कारण आदिवासी के अंदर यूनिटी पावर फुल के चलते करूना अपना प्रभाव डाल नही सका।
    लेकिन सेवन की मापदंड सही होना चाहिए नही तो परिणाम भयावह हो सकता है।

    महुआ क्या है —–अप्रैल माह मे महूल बृक्ष मे उत्पन्न फूल जो महुआ है, ये हर वक्त बृक्ष के बृन्त से नहीं टपकता है ।बिहाने बिहाने जब मलय बयार महूल बृक्ष को सहलाते हुए गुदगुदी देता है तब बृक्ष की बृन्त से बिच्छेद हो कर नीचे टपकता है महुआ । महुआ का टपकना कुछ समय के लिए ही होता है।सूर्य के आगमन के आहट से महुआ का टपकना बंद हो जाता है।समय सीमा मे आया तो पाया ।ये अनुशासित के पाठ के साथ कर्तव्यनिष्ठ होने का प्रेरणा भी देता है।आदिवासी इसे जीवन रक्षक सुरक्षा का प्रतीक मानते है ।आदिवासी का जीवन यात्रा महुआ का यांत्रिक पद्धति के रस से होता है और पूजा पाठ के साथ अंतिम विदाई तक महुआ का रस चढाना और सेवन करना पड़ता है। रूप लावण्य मे अंगुर से महुआ का कम नही है जो अनायास अपने ओर आकृष्ट करने का शक्ति रखता है।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Article29 मई को दुमका में गेंजर सेटेलमेंट के खिलाफ ग्रामप्रधानों देंगे धरना
    Next Article टोंगरा थाना में लगातार वाहन चेकिंग से हड़कंप, नौ बाइक चालकों के ऊपर किया कार्रवाई

    Related Posts

    श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव के तृतीय दिवस पर शामिल हुए दिनेश कुमार

    June 13, 2026

    निजी विद्यालयों की मनमानी पर लगाम की मांग, पुस्तक परिवर्तन और शुल्क वृद्धि पर राज्य स्तरीय नीति बनाने की उठी आवाज

    June 13, 2026

    श्री राजस्थान शिवमंदिर जुगसलाई के शताब्दी वर्ष पर धार्मिक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता 21 जून को

    June 13, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    सड़कों पर जानकारी का अधिकार: पारदर्शिता की मांग

    अनन्या तिवारी ने जीती ऑल इंडिया नेशनल डांस प्रतियोगिता

    टीएमसी में बगावत: कौन है इसका मास्टरमाइंड?

    घातक खतरा: सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री का खुलेआम प्रसार

    गृहिणी राष्ट्रनिर्माता होकर भी क्यों है हिंसा की शिकार?

    अडिग विश्वास का स्तंभ: मेरे पिता की शक्ति

    श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव के तृतीय दिवस पर शामिल हुए दिनेश कुमार

    निजी विद्यालयों की मनमानी पर लगाम की मांग, पुस्तक परिवर्तन और शुल्क वृद्धि पर राज्य स्तरीय नीति बनाने की उठी आवाज

    श्री राजस्थान शिवमंदिर जुगसलाई के शताब्दी वर्ष पर धार्मिक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता 21 जून को

    बाघराय मार्डी का आंदोलन लाया रंग, UCIL स्कूलों में अब गरीब बच्चों को भी मिलेगा दाखिला

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.