डॉ अनु सिन्हा खजुराहो नृत्य महोत्सव के स्वर्ण जयंती समारोह में प्रस्तुति देकर जमशेदपुर शहर का मान बढ़ाएंगी
अपनी कला एवं संस्कृति को सहेजने का हर सम्भव प्रयास करना चाहिए l न केवल सहेजने का बल्कि उसे आगे बढ़ाना एक कलाकार का कर्तव्य है l सुप्रसिद्ध नृत्यांगना एवं फाउंडेशन फॉर कृष्णा कला एवं एजुकेशन सोसाइटी की निर्देशिका डॉ अनु सिन्हा इस कर्तव्य को अपना धर्म भी समझती हैं और ईश्वर उनके हर अभियान को सफल बनाते हैं l इसी श्रृंखला में माता सरस्वती के कृपा एवं बड़ों के आशीर्वाद से डॉ अनु सिन्हा जी को खजुराहो नृत्य महोत्सव में प्रतिनिधित्व करने का सुखद अवसर मिला l विश्व प्रसिद्द खजुराहो नृत्य महोत्सव के स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर डॉ अनु सिन्हा जी उस मंच पर नृत्य की दूसरी बार प्रस्तुति देकर शहर का मान बढ़ाएगी l यह जमशेदपुर शहर के लिए भी गौरव की बात है l जमशेदपुर में जन्मी डॉ. अनु सिन्हा को बचपन से ही नृत्य से लगाव था एवं इनकी शिक्षा दीक्षा भी यहीं हुई I इससे पहले डॉ अनु सिन्हा 2018 में खजुराहो नृत्य महोत्सव में अपनी प्रस्तुती दे चुकी हैं l
खजुराहो नृत्य महोत्सव में भागीदारी नृत्य के क्षेत्र में पद्मश्री मिलने जैसा अनुभव कराता है l सबको विश्वास है कि इस बार के खजुराहो महोत्सव में डॉ अनु सिन्हा जी की नृत्य समूह दिनांक 24 फरवरी को कई सुन्दर सुन्दर प्रस्तुती देकर दशकों को मंत्र मुग्ध कर देंगी l डॉ अनु सिन्हा जी के नृत्य समूह में कुल 14 सदस्य हैं जिसमें से 8 नर्तक और नर्तकी हैं बाकि अन्य संगतकार हैं l संगतकार के रूप में गायन में विजय परिहार, तबले पर मोहित गंगानी, सारंगी पर सलमान ख़ान, सितार पर अवनीश गंगानी, पखावज पर अवसर मुला जफर जी का नाम उल्लेखनीय है l नृत्यांगना में स्वयं अनु सिन्हा सोलो नृत्य प्रस्तुत करेंगी और युगल में अनु सिन्हा जी का साथ देंगे अवसर मुला जफर जो कि स्वयं एक विश्व प्रसिद्द नृत्य कलाकर हैं l अन्य कई प्रस्तुतियों में डॉ अनु सिन्हा जी के कई शिष्य और शिष्यायें भाग लेंगी l प्रस्तुतियों की श्रृंखला इस प्रकार है,प्रथम प्रस्तुति के रूप में गणेश वंदना रहेंगी जिसके बोल “प्रथम सुमिरन श्री गणेश” जो कि राग देश और ताल चौताल पर आधारित है l दूसरी प्रस्तुति राम भजन हैं जो राग भैरवी में है, तीन ताल पर आधारित l उसके पश्चात शिव स्तुति होगी जो राग माल कोश में है और ताल चौताल l अंतिम प्रस्तुति ठुमरी से होगी जो राग देश में और तीन ताल पर आधारित है l इन प्रस्तुतियों अतिरिक्त कई परंपरागत टुकड़ी टुकड़ी नृत्य प्रस्तुति रहेंगी l इतने बड़े आयोजन का हिस्सा बनने पर अनु सिन्हा जी ने मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग का आभार व्यक्त किया और यह उपलब्धि अपने गुरु राजेंद्र गंगानी जी को समर्पित करते हुए यह सब उनका आशीर्वाद बताया l
ज्ञात हो कि डॉ अनु सिन्हा जी जयपुर घराने के प्रसिद्ध नृत्य गुरु राजेंद्र गंगानी जी की शिष्या हैं और नृत्य कला में आपकी अलग पहचान है l डॉ अनु सिन्हा जी की नृत्य नाटिका ध्रुवस्वामिनी, मीरा, रामायण, उर्वशी, द्रौपदी, दशावतार, कामायनी नृत्य नाटक पसंद करने वालों को बहुत प्रिय है l डॉ अनु सिन्हा जी के कई शिष्य और शिष्यायें देश विदेश में नृत्य कला से नाम रोशन कर रहे हैं l

