माझी परगना महाल ने किया उपायुक्त कार्यालय के समक्ष आक्रोश प्रदर्शन
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर माझी परगना महाल ने किया उपायुक्त कार्यालय के समक्ष आक्रोश प्रदर्शन, नगर निगम विस्तार, पेसा कानून व सारना धर्म कोड को लेकर सौंपा ज्ञापन
पूर्वी सिंहभूम जिले के जुगसलाई तोरोप, थाड़ दिशोम क्षेत्र के पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के प्रतिनिधियों—माझी परगना महाल की अगुवाई में मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय आक्रोश विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य प्रस्तावित जमशेदपुर नगर निगम विस्तारीकरण योजना को निरस्त करना, झारखंड राज्य में पेसा कानून को अविलंब लागू करना और आदिवासियों के लिए ‘सारना धर्म कोड’ को मान्यता दिलाना था।
प्रदर्शन के उपरांत प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त, पूर्वी सिंहभूम के माध्यम महामहिम राष्ट्रपति, माननीय राज्यपाल (झारखंड), केंद्रीय गृह मंत्री, मुख्यमंत्री (झारखंड सरकार) और अध्यक्ष, जनजाति आयोग (नई दिल्ली) को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
पारंपरिक आदिवासी शासन व्यवस्था पर खतरा
आदिवासी समुदायों की पारंपरिक स्वशासन प्रणाली, धार्मिक रीति-रिवाज, और जल-जंगल-जमीन पर अधिकार भारतीय संविधान की धारा 13(3)(क) और पेसा अधिनियम 1996 द्वारा संरक्षित हैं। नगर निगम विस्तार से इन व्यवस्थाओं को गहरी चोट पहुंचेगी।
CNT एक्ट और पांचवीं अनुसूची का उल्लंघन
नगर निगम बनने से CNT एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन होगा और आदिवासियों की जमीन अधिग्रहण की आशंका जताई गई। इससे उनकी संस्कृति, जीवनशैली और पहचान पर सीधा संकट उत्पन्न होगा।
सारना धर्म कोड को मान्यता मिले:आदिवासी समुदाय ने मांग की कि सारना धर्म को जनगणना प्रपत्र में स्वतंत्र धर्म कोड के रूप में मान्यता दी जाए।
माझी परगना महाल के प्रतिनिधियों ने कहा कि अगर सरकार ने मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो आदिवासी समाज व्यापक आंदोलन करेगा।

