खनन संशोधन कानून को लेकर राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन, झारखंड के अधिकारों की रक्षा की मांग
राष्ट्र संवाद संवाददाता
चांडिल। खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 को लेकर झारखंड में चिंता जताते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के नाम प्रखंड विकास पदाधिकारी/अंचलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया है। ज्ञापन में राज्यों के संवैधानिक अधिकारों, झारखंड की वित्तीय स्वायत्तता तथा आदिवासी-मूलवासी समाज के जल, जंगल, जमीन और खनिज अधिकारों की रक्षा की मांग की गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि झारखंड और राष्ट्रपति के बीच संबंध केवल संवैधानिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी हैं। वर्ष 2015 से 2021 तक झारखंड की राज्यपाल के रूप में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राज्य के गांवों, आदिवासी-मूलवासी समाज और आम लोगों के जीवन को करीब से देखा है। ऐसे में राज्य की धरती, संसाधनों और भविष्य से जुड़े विषय पर विशेष संवेदनशीलता की अपेक्षा की गई है।
ज्ञापन में कहा गया कि झारखंड की पहचान उसकी मिट्टी, जंगल, पहाड़, नदियों और खनिज संपदा से है। आदिवासी एवं मूलवासी समाज के लिए ये संसाधन केवल प्राकृतिक संपदा नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति, पहचान और अस्तित्व का हिस्सा हैं। भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो और तिलका मांझी जैसे वीरों के संघर्ष का उल्लेख करते हुए जल-जंगल-जमीन और अधिकारों की रक्षा को ऐतिहासिक संघर्ष बताया गया है।
ज्ञापन में कहा गया कि खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 का मुद्दा केवल खनिज उपकर या राजस्व तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यों के संवैधानिक अधिकारों, संघीय व्यवस्था और राज्य की विकास क्षमता से भी जुड़ा है।
संशोधन के तहत MMDR Act में जोड़ी गई धारा 9D का उल्लेख करते हुए कहा गया कि इसके तहत राज्य सरकारों की खनिज अधिकारों अथवा खनिज-युक्त भूमि पर कर, उपकर या अन्य लेवी लगाने की शक्ति प्रभावित हो सकती है। ज्ञापन में राष्ट्रपति से इस पूरे मामले पर संवैधानिक अधिकारों और झारखंड के हितों को ध्यान में रखते हुए हस्तक्षेप करने तथा राज्य के जल, जंगल, जमीन और खनिज अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है।मौके पर धरना प्रदर्शन में

