Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » यूरोप की कई कार कंपनियां भारत में तलाश रहीं विनिर्माण के अवसर : गोयल
    Breaking News Headlines राष्ट्रीय

    यूरोप की कई कार कंपनियां भारत में तलाश रहीं विनिर्माण के अवसर : गोयल

    News DeskBy News DeskOctober 23, 2026No Comments5 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    (राजेश राय)

    बर्लिन, 23 अक्टूबर (भाषा) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि कई यूरोपीय कंपनियों ने भारत में निवेश को लेकर रुचि दिखाई है और इनमें से कई कार कंपनियां देश में विनिर्माण के अवसर तलाश रही हैं।

    आधिकारिक यात्रा पर यहां आए मंत्री ने कहा कि जर्मनी की कंपनियां स्वास्थ्य सेवा, औषधि और अनुसंधान एवं विकास जैसे क्षेत्रों में निवेश करने में रुचि रखती हैं।

    उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘यूरोपीय संघ (ईयू) अपने ऊपर जिस तरह के नियामकीय बोझ बढ़ा रहा है, उसे देखते हुए यूरोप के विनिर्माण क्षेत्र को ऐसे भरोसेमंद साझेदार देशों की तलाश करनी होगी, जहां कम से कम उन कई चीजों का उत्पादन किया जा सके, जो यूरोप में बहुत महंगी होती जा रही हैं। इसलिए मुझे भारत के लिए अपार संभावनाएं और यहां बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की उम्मीद दिखती है।’’

    यूरोपीय संघ कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (सीबीएएम) और वनों की कटाई से संबंधित नियमों सहित कई नियमन लागू कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय इस्पात उद्योग हरित इस्पात में भारी निवेश कर रहा है और देश में स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल बढ़ रहा है।

    गोयल ने कहा, ‘‘यहां की कई वाहन कंपनियां भी भारत में विनिर्माण पर विचार कर रही हैं।’’

    उन्होंने कहा कि यूरोपीय कंपनियां इंजीनियरिंग, वैमानिकी, रक्षा, जहाज निर्माण और जहाजों की मरम्मत जैसे क्षेत्रों में भी भारत में कारोबारी अवसर तलाश रही हैं।

    यूरोप की कई वाहन विनिर्माता कंपनियों ने भारत में विनिर्माण संयंत्र स्थापित किए हैं और घरेलू के साथ-साथ निर्यात बाजारों की जरूरतें पूरी करने के लिए देश को आधार बनाया है।

    जर्मनी की फॉक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू और ऑडी जैसी कार कंपनियां भारत में कारोबार कर रही हैं, जबकि चेक गणराज्य की कार कंपनी स्कोडा की भी देश में मौजूदगी है।

    गोयल ने कहा, ‘‘हम भारत से करीब 10 लाख कारों का निर्यात करते हैं। जल्द ही आप देखेंगे कि भारत में बनी कारें यूरोप में भी पहुंचने लगेंगी। इसलिए मेरा मानना है कि उच्च प्रौद्योगिकी वाले क्षेत्रों में भारत की भागीदारी बढ़ रही है।’’

    उन्होंने कहा कि जर्मनी की कंपनियों ने उनके साथ द्विपक्षीय बैठकों के दौरान भारत में बड़े निवेश की योजनाओं के बारे में बताया है।

    किसी कंपनी का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि भारत में करीब चार अरब यूरो का कारोबार करने वाली एक कंपनी इसे बढ़ाकर 10 अरब यूरो करने की योजना बना रही है।

    इस संवाददाता सम्मेलन में जर्मनी में भारत के राजदूत अजीत गुप्ते ने कहा कि पिछले ढाई साल में जर्मनी की कंपनियों ने भारत में 7.4 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा की है।

    गोयल ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता दोनों पक्षों के कारोबारियों को व्यापार और निवेश बढ़ाने के बड़े अवसर उपलब्ध कराएगा।

    मंत्री ने कहा कि भारत तथा यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते से वस्तुओं एवं सेवाओं की आवाजाही और सुगम होगी।

    इस समझौते पर इस साल के अंत तक हस्ताक्षर होने और 2027 की पहली तिमाही में इसके लागू होने की उम्मीद है।

    उन्होंने कहा, ‘‘मुक्त व्यापार समझौता सिर्फ आयात शुल्क दरों में कटौती, रियायती शुल्क दरों या बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराने के बारे में नहीं है। यह निश्चितता, निरंतरता और पूर्वानुमान की क्षमता का प्रतीक है। इससे यह भरोसा मिलता है कि आपूर्ति श्रृंखलाएं खुली रहेंगी।

    उन्होंने मुक्त व्यापार समझौते को भविष्य के लिए एक व्यापक साझेदारी बताया।

    गोयल ने कहा, ‘‘वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता के बीच मेरा मानना है कि भरोसेमंद साझेदारियां भविष्य तय करेंगी। विविधीकृत आपूर्ति श्रृंखलाएं और व्यापारिक संबंधों में विश्वसनीयता की क्षमता महत्वपूर्ण हैं।’’

    उन्होंने कहा कि भारत की व्यापक उत्पादन क्षमता और यूरोप की प्रौद्योगिकी मिलकर ऐसा संयोजन बनाएंगे, जिसका मुकाबला करना मुश्किल होगा।

    भारत में लालफीताशाही कम करने के बारे में पूछे जाने पर गोयल ने कहा कि सरकार कई छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और करीब 40,000 अनुपालन संबंधी बोझ हटाने या कम करने जैसे कई कदम उठा रही है।

    बृहस्पतिवार को आयोजित कार्यक्रम में जर्मनी की संघीय आर्थिक मामलों एवं ऊर्जा मंत्री कैथरीना आर. ने दोनों देशों को द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने और लालफीताशाही कम करने पर विचार करने का सुझाव दिया था।

    वहीं सीबीएएम के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ इस मुद्दे पर सौहार्दपूर्ण समाधान पर पहुंच गए हैं।

    उन्होंने कहा, ‘‘मैं यूरोप के व्यापक भविष्य के बारे में बात कर रहा था। सवाल भारत या भारत पर सीबीएएम के प्रभाव के बारे में नहीं था। भारत पर इसका असर ठीक रहेगा। हम खुद अपनी अर्थव्यवस्था को तेजी से कार्बन उत्सर्जन से मुक्त कर रहे हैं। इससे हमें वास्तव में लाभ होगा, क्योंकि हमारे प्रतिस्पर्धियों को सीबीएएम की लागत का सामना करना पड़ेगा।’’

    गोयल ने कहा कि भारत, यूरोप को निर्यात करने वाले उद्योगों को कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की प्रक्रिया तेज करने में मदद करेगा। वहीं, यूरोप भी भारतीय उद्योगों को तेजी से कार्बन उत्सर्जन कम करने में सहायता देगा।

    जर्मनी में भारतीयों के लिए रोजगार के अवसरों के बारे में पूछे जाने पर गोयल ने कहा कि वहां बड़े पैमाने पर अवसर हैं और जर्मन कंपनियां हजारों लोगों को नौकरी पर रखने की इच्छुक हैं।

    उन्होंने कहा कि जर्मनी में काम करने की आकांक्षा रखने वाले भारतीय विद्यार्थियों को जर्मन भाषा सीखनी चाहिए और वहां की संस्कृति से परिचित होना चाहिए।

    गोयल ने कहा कि विदेश मंत्रालय, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय मिलकर जर्मन भाषा सिखाने के लिए अधिक केंद्र स्थापित करने पर काम कर रहे हैं।

    वर्तमान में जर्मनी की 2,000 से अधिक कंपनियां भारत में कारोबार कर रही हैं। जर्मनी, भारत में 10वां सबसे बड़ा निवेशक है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश को इससे 49.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) मिला था।

    अप्रैल 2000 से जून 2026 के बीच भारत को जर्मनी से 15.84 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मिला।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleझोटा की हत्या को लेकर मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग पर विधानसभा में कांग्रेस विधायकों का हंगामा
    Next Article कर्नाटक के मुख्यमंत्री शिवकुमार ने पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क से मुलाकात की

    Related Posts

    पीएनके टाइप दुर्गा पूजा धूमधाम से संपन्न, कमेटी के पदाधिकारियों और सदस्यों का रहा सराहनीय योगदान

    October 23, 2026

    कर्नाटक के मुख्यमंत्री शिवकुमार ने पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क से मुलाकात की

    October 23, 2026

    झोटा की हत्या को लेकर मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग पर विधानसभा में कांग्रेस विधायकों का हंगामा

    October 23, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    पीएनके टाइप दुर्गा पूजा धूमधाम से संपन्न, कमेटी के पदाधिकारियों और सदस्यों का रहा सराहनीय योगदान

    कर्नाटक के मुख्यमंत्री शिवकुमार ने पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क से मुलाकात की

    यूरोप की कई कार कंपनियां भारत में तलाश रहीं विनिर्माण के अवसर : गोयल

    झोटा की हत्या को लेकर मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग पर विधानसभा में कांग्रेस विधायकों का हंगामा

    निशानेबाज मोना अग्रवाल ने एशियाई पैरा खेलों में विश्व रिकॉर्ड के साथ दूसरा स्वर्ण जीता

    संरा की स्थापना के 80 साल बाद भी शांति कायम करने के लिए जूझ रही सुरक्षा परिषद: भारत

    हैरी ब्रूक ने 114 गेंदों में जड़ा वनडे का सबसे तेज दोहरा शतक, शुभमन गिल का वर्ल्ड रिकॉर्ड टूटा

    कार के बोनट पर पिता-पुत्र को 4 किलोमीटर तक घसीटा, ग्रामीणों ने पीछा कर रुकवाई गाड़ी

    ग्वालियर में 14 साल के बच्चे की बलि देने की कोशिश का आरोप, गले और सिर पर चाकू से किए 9 वार

    जेईई मेन 2027 के रजिस्ट्रेशन का इंतजार बढ़ा, जनवरी में परीक्षा की तैयारी तेज करें छात्र

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.