जरा याद करो वो कुर्बानी
#देवानंद #देव
जरा याद करो वो कुर्बानी,
जो बनी थी सीढ़ी सत्ता की ,
जो खुशियां घर घर बंटी थी,
जिन कंधों के दम पर पहना ताज ,
वो गर्दन सबसे पहले कटी थी।
स्वर्ण ने अपना हक़ भी छोड़ा,
मौन स्वीकृति को धर्म बताया,
तुम्हारी जीत की खातिर उसने
हर ज़ख़्म को गले लगाया ।
नारे तुमने अपने लिखे थे,
भीड़ ने भी ताली खूब बजाईं,
पर मशाल जलाने से पहले
सोचो किसने उँगलियाँ जलाईं—
जरा याद करो वो कुर्बानी।
आज तख़्त से देते हो उपदेश,
इतिहास तुम्हें अब देख रहा है,
जिस वर्ग ने तुम्हें भगवान बनाया,
वह आज सवाल बनकर खड़ा है।
#देव सहयोग ##कबीर


