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    Home » शिबू सोरेन की प्रतिमा विवाद पर झामुमो ने की एकता की अपील
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    शिबू सोरेन की प्रतिमा विवाद पर झामुमो ने की एकता की अपील

    Devanand SinghBy Devanand SinghAugust 1, 2026No Comments3 Mins Read
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    लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता

    झारखंड के दिग्गज नेता शिबू सोरेन की प्रतिमा को लेकर चल रहा विवाद अब नया मोड़ ले चुका है, जहां झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने सभी पक्षों से आपसी सौहार्द और राज्य की एकता बनाए रखने की भावुक अपील की है।

    शिबू सोरेन की प्रतिमा पर झामुमो का स्पष्ट रुख

    दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रस्तावित प्रतिमा को लेकर चल रहे विवाद के बीच झामुमो ने इसे आपसी सौहार्द और झारखंड की एकता के नजरिए से देखने की अपील की है।

    शनिवार को चाईबासा स्थित दिशोम गुरु शिबू सोरेन चौक पर आयोजित प्रेस वार्ता में झामुमो जिलाध्यक्ष सोनाराम देवगम ने कहा कि संबंधित मौजा के ग्रामसभा सदस्यों और रैयतों की ओर से प्रतिमा स्थापना पर आपत्ति नहीं जताई गई है।

    उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा उठाए जा रहे सवालों का समाधान बातचीत और प्रशासनिक स्तर पर होना चाहिए।

    देवगम ने कहा कि झारखंड के सभी शहीद, वीर सपूत और ऐतिहासिक व्यक्तित्व राज्य की साझा धरोहर हैं।

    किसी एक महापुरुष के सम्मान को दूसरे के सम्मान के विरोध में खड़ा करना उचित नहीं है।

    उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तत्व कोल्हान और संथाल परगना के बीच विभाजन की भावना पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं।

    झामुमो ने सभी पक्षों से संयम बरतते हुए विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की।

    शिबू सोरेन, जिन्हें सम्मानपूर्वक दिशोम गुरु कहा जाता है, झारखंड आंदोलन के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक हैं और उन्होंने अलग राज्य के गठन में निर्णायक भूमिका निभाई है। उनकी प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव लंबे समय से चर्चा में रहा है, लेकिन हालिया विवाद ने इसे राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का केंद्र बना दिया है।

    चाईबासा स्थित दिशोम गुरु शिबू सोरेन चौक पर प्रस्तावित प्रतिमा का निर्माण स्थानीय प्रशासन और ग्रामसभा की सहमति के बाद ही शुरू किया जाना था। झामुमो जिलाध्यक्ष सोनाराम देवगम ने स्पष्ट किया कि संबंधित मौजा के ग्रामसभा सदस्यों और रैयतों ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई है, जिससे यह साफ होता है कि स्थानीय स्तर पर सहमति बनी हुई है।

    हालांकि, कुछ संगठनों और व्यक्तियों ने प्रतिमा की डिजाइन, स्थान और वित्तपोषण को लेकर सवाल उठाए हैं। इन सवालों का समाधान बातचीत और प्रशासनिक स्तर पर किए जाने की मांग झामुमो ने दोहराई है, ताकि मामला अदालत या सड़क पर न जाए।

    झारखंड के इतिहास में कोल्हान और संथाल परगना का सांस्कृतिक और भौगोलिक महत्व रहा है। झामुमो ने आरोप लगाया कि कुछ तत्व इन दोनों क्षेत्रों के बीच विभाजन की भावना भड़काने का प्रयास कर रहे हैं, जो राज्य की एकता के लिए घातक हो सकता है। पार्टी ने सभी समुदायों से संयम बरतने और शांतिपूर्ण समाधान की ओर बढ़ने का आह्वान किया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विवाद का असर आगामी चुनावों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि शिबू सोरेन की विरासत झामुमो के लिए भावनात्मक मुद्दा है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि यह मुद्दा विकास और एकता के विमर्श तक सीमित रहे, न कि विवाद का रूप ले।

    अंत में, शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापना का मुद्दा केवल एक मूर्ति का नहीं, बल्कि झारखंड की अस्मिता और साझा विरासत का प्रतीक है। झामुमो की अपील है कि सभी पक्ष मिलकर इसका समाधान निकालें और राज्य की एकता को मजबूत करें।

    शिबू सोरेन के जीवन और योगदान के बारे में विस्तार से जानने के लिए विकिपीडिया पर उनका पृष्ठ देखें।

    चाईबासा झारखंड एकता प्रतिमा विवाद
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