झारखंड भाजपा संगठन से दूर हो गई है:सतीश सिंह
धीरज कुमार सिंह
जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रही है राजनीतिक दलों का बड़े नेताओं का जमशेदपुर आना शुरू हो गया है कोल्हान में 2019 के चुनाव में भाजपा की दुर्दशा के क्या कारण है इस पर राष्ट्र संवाद में एक श्रृंखला चलाने का मन बनाया है और इसी कड़ी में भाजपा के पुराने कार्यकर्ता सतीश सिंह से राष्ट्र संवाद ने की बातचीत
आज की झारखंड बीजेपी संगठन से दूर हो गई है । पहले भाजपा में संगठन की चलती थी। कार्यकर्ताओं की बात सरकार से जुड़े लोग सुनने के लिए बाध्य होते थे। जिसके कारण भाजपा कार्यकर्ताओं ने लंबी लड़ाई लड़कर सत्ता हासिल की । किंतु आज भाजपा में नेताओं का चल रहा है, संगठन नेताओं के इर्द-गिर्द घूम रहा है। उक्त बातें राष्ट्र संवाद से बातचीत करते हुए
नरेंद्र मोदी यूथ ब्रिगेड के संयोजक सतीश सिंह ने कहा भाजपा संगठन से दुखी सतीश सिंह ने कहा कि नेताओं में भी दूसरे दल से आने वाले नेताओं का संगठन में ज्यादा तवज्जो दीया जा रहा है। कार्यकर्ता ठगा हुआ महसूस करता है। लोकसभा चुनाव में कार्यकर्ताओं की अनदेखी और नेताओं की मनमर्जी देखने लायक थी।
श्री सिंह ने कहा कि अब कार्यकर्ताओं को कोई पूछ नहीं रहा था और नेता व्यवस्था लुटने के लिए परेशान हो रहे थे। संगठन दो-तीन नेताओं के इर्द-गिर्द घूम रहा था । नतीजतन भाजपा पांचो आदिवासी सीट हार गई ।लोकसभा चुनाव में हो रहे हो अव्यवस्था देखने के बाद भी संगठन उन्हीं नेताओं का सम्मान कार्यक्रम करवा रही है। जिससे समर्पित कार्यकर्ता को और दुख पहुंच रहा है ऐसी स्थिति में झारखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा 20 सीट का आंकड़ा भी नहीं पर कर पाएगी।
ज्ञात हो कि सतीश सिंह जनसंघ काल के कार्यकर्ता है राम जन्मभूमि आंदोलन में कम उम्र में ही सतीश ने एक अलग पहचान बनाई थी उन्होंने कहा कि जमशेदपुर पूर्वी में पिछले 25 सालों से बस्ती विकास समिति के द्वारा भाजपा का डमी संगठन चलाया जा रहा है। बस्ती विकास समिति के नेताओं को भाजपा के नेताओं से ज्यादा सुना जाता रहा है। जिससे भाजपा कार्यकर्ताओं में होने वाला आक्रोश का दंश 2019 के विधानसभा चुनाव में दिखा।
भाजपा का किला माना जाने वाला जमशेदपुर सहित कोल्हान में भाजपा को एक सीट नहीं मिली। मुख्यमंत्री भी चुनाव हार गए। अगर भाजपा पुन: अपनी पकड़ बनाना चाहती है तो सबसे पहले पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान देना एवं संगठन पर नेताओं के पकड़ को ढीली करना जरूरी होगा। संगठन को पर्याप्त शक्ति देनी होगी जिला से लेकर प्रदेश के प्रभारी को बदलना होगा। विधानसभा चुनाव के पूर्व अगर भाजपा पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को ताकि देती है तो परिणाम सकारात्मक दिखेंगे