लेखक: मनीषा शर्मा
जनगणर प्रेरणा, आमार साहस का राहत अभियान
शोणितपुर जिले के नदुआड़ निर्वाचन क्षेत्र के जामुगुड़ीहाट और नागशंकर से रवाना होकर रविवार दोपहर ‘जनगणर प्रेरणा, आमार साहस‘ नामक एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) की टीम शिवसागर के एक दुर्गम क्षेत्र में पहुंची। पाँच सहृदय व्यक्तियों द्वारा गठित यह संगठन रविवार सुबह पाँच बजे नदुआड़ के नागशंकर से यात्रा शुरू कर दोपहर १२:३० बजे सुदूर शिवसागर के अत्यंत दुर्गम क्षेत्र खनिकर दिरोई कैबर्त्त गाँव में नाव के ज़रिए आवश्यक वस्तुओं के साथ बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुँचा और राहत सामग्री का वितरण किया।
संगठन की स्थापना और उद्देश्य
२०२६ में शोणितपुर जिले के नदुआड़ निर्वाचन क्षेत्र में गठित ‘जनगणर प्रेरणा, आमार साहस‘ एक गैर-सरकारी संगठन है। जनता की किसी भी विपदा के समय उनके साथ खड़े होकर मदद करने के उद्देश्य से इस संगठन की स्थापना नदुआड़ तथा जामुगुड़ीहाट के रंगाचकुआ निवासी युवा पत्रकार एवं प्रकृति प्रेमी युवक चंदन शर्मा ने की थी।
पदाधिकारियों की भूमिका
इस संगठन में नागशंकर के पुतुल बोरा अध्यक्ष, जामुगुड़ीहाट के चंदन शर्मा मुख्य सलाहकार एवं प्रचार सचिव, नागशंकर की लीमा भुइयां वित्त विभाग, दीप्ति द्युति बोरा सचिव और रंजीत दास सक्रिय सदस्य के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
भविष्य की योजनाएं
संगठन के सभी पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि बाढ़ पीड़ितों को दी गई खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक सामानों से प्रभावित लोगों को निश्चित रूप से राहत मिलेगी। संगठन के मुख्य सलाहकार चंदन शर्मा ने हमें बताया कि आने वाले दिनों में भी संगठन की ओर से कुछ अनूठे और समाजोपयोगी प्रयास किए जाएंगे।
असम में हर साल आने वाली बाढ़ लाखों लोगों को प्रभावित करती है। इस वर्ष भी ब्रह्मपुत्र नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। शिवसागर जिले के दूरदराज के गांवों तक पहुंचना प्रशासन के लिए भी चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। जनगणर प्रेरणा, आमार साहस जैसी संस्थाएं जमीनी स्तर पर काम करके राहत पहुंचाने में अग्रणी रही हैं।
चंदन शर्मा ने बताया कि संगठन का गठन समाज के वंचित वर्गों की सहायता के लिए किया गया है। वे स्वयं एक पत्रकार होने के नाते ग्रामीण समस्याओं को करीब से समझते हैं। संगठन ने पूर्व में भी कोविड-19 महामारी के दौरान मास्क, सैनिटाइजर और राशन वितरण जैसे कार्य किए हैं। इस बार बाढ़ राहत के लिए उन्होंने नाव का प्रबंध करके दुर्गम गांव तक सामग्री पहुंचाई।
बाढ़ प्रभावित खनिकर दिरोई कैबर्त्त गांव के निवासियों ने राहत सामग्री मिलने पर संतोष व्यक्त किया। ग्रामीणों ने बताया कि वे कई दिनों से बाढ़ के पानी से घिरे हुए थे और खाने-पीने का सामान खत्म हो गया था। संगठन द्वारा प्रदान किए गए चावल, दाल, तेल, नमक और बिस्कुट के पैकेट उनके लिए जीवनरक्षक साबित हुए।
असम सरकार और जिला प्रशासन भी बाढ़ राहत कार्यों में लगे हुए हैं, लेकिन संसाधनों की कमी और भौगोलिक कठिनाइयों के कारण हर गांव तक तुरंत पहुंचना संभव नहीं हो पाता। ऐसे में जनगणर प्रेरणा, आमार साहस का यह प्रयास सराहनीय है। सामाजिक संगठनों और नागरिक समाज की ऐसी पहल आपदा प्रबंधन में पूरक की भूमिका निभाती है।
असम में बाढ़ राहत कार्यों के बारे में अधिक जानकारी के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की वेबसाइट देखें।
संगठन के सदस्यों ने भविष्य में स्वास्थ्य शिविर, शिक्षा सहायता और आजीविका प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रम चलाने की योजना बनाई है। चंदन शर्मा ने कहा, “हमारा लक्ष्य केवल तात्कालिक राहत देना नहीं, बल्कि समुदाय को दीर्घकालिक रूप से सशक्त बनाना है।” यह दृष्टिकोण इसे अन्य राहत कार्यों से अलग करता है।

