जमशेदपुर : 8 साल की उम्र से हीं माँ दुर्गा की मूर्ति बनाना शुरू किया है. जब मैं छोटी थी और मूर्तिकारों के पास गयी की हमको भी मूर्ति कारो ने तिरस्कार किया और फिर हमने अपने मन मे ठाना की हम माँ की आराधना कर के माँ की मूर्ति को बनाएगे. हम को लोग हिजड़ा कहता है तो कोई छक्का कहता है कोई हमको प्यार नहीं देता है.
इस लिए हम माँ की मूर्ति जब बनाते है तब माँ की आँखो पर बिसेष धयान देते है और माँ से बिनती करते है की हे माँ समाज के लोगो की आँखे खोलो उनको बताव की हम तिरस्कार के लिए नहीं है बल्कि हमको भी प्यार की जरुरत है माँ माँ की मूर्ति के लिए हम हर साल कोलकाता जाकर मिट्टी लाते थे लेकिन इस बार बारिस अधिक होने के कारण हमने जमशेदपुर के खरखाई नदिनसे मिट्टी को लाया है और माँ की मूर्ति को बनाया है
हमारे साथ करीबन 10 किन्नर है जो हमको मूर्ति बनाने मे मदद करती है. माँ से बस हम यही मांगते है की माँ समाज की नज़रिया को हमारे लिए बदले ताकी हमको भी मान समान मिल सके सभी को सुखी रखे माँ और माँ से यही बिनती है की हमको अगले जन्म मे भी किन्नर हीं बनाना. सभी की माँ दुर्गा पूजा की बहुत बहुत बधाई

