Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » जमशेदपुर: 100+ ATM सिक्योरिटी गार्ड्स को निकाला, सरयू राय मदद को आगे

    जमशेदपुर: 100+ ATM सिक्योरिटी गार्ड्स को निकाला, सरयू राय मदद को आगे

    Nikunj GuptaBy Nikunj GuptaJune 7, 2026No Comments6 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    सिक्योरिटी गार्ड्स को निकाला
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    जमशेदपुर में भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम की सुरक्षा में तैनात 100 से अधिक सिक्योरिटी गार्ड्स को नई कंपनी सीआईएसएस ने बिना किसी पूर्व सूचना या वैध कारण के नौकरी से निकाल दिया है। यह घटना शहर में एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है, खासकर उन कर्मचारियों के लिए जिन्होंने दशकों तक अपनी सेवाएँ दी हैं। यह अचानक उठाया गया कदम कई परिवारों के लिए अनिश्चितता और आर्थिक संकट लेकर आया है। इस बड़े पैमाने पर सिक्योरिटी गार्ड्स को निकाला जाने का मुद्दा रविवार को तब सामने आया जब प्रभावित गार्ड्स ने जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय से मुलाकात की, अपनी पीड़ा व्यक्त की और मदद की गुहार लगाई।

    इन सिक्योरिटी गार्ड्स की संख्या 100 से ज्यादा बताई जा रही है, जो एक साथ बेरोजगार हो गए हैं। इन सभी कर्मचारियों का दावा है कि वे 10 साल या उससे ज्यादा समय से विभिन्न एटीएम की सुरक्षा में तैनात थे। उनकी लंबी सेवा और अनुभव के बावजूद, उन्हें अचानक और अकारण बाहर का रास्ता दिखा दिया गया, जिससे उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

    जमशेदपुर: क्यों 100+ ATM सिक्योरिटी गार्ड्स को निकाला, गहराया संकट

    यह मामला जमशेदपुर के असंगठित क्षेत्र में मजदूरों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। नई कंपनी सीआईएसएस के आने के बाद से ही इस तरह की छंटनी की खबरें आ रही हैं, लेकिन 100 से अधिक अनुभवी सिक्योरिटी गार्ड्स को एक साथ निकालने का यह कदम अभूतपूर्व है। गार्ड्स का आरोप है कि उन्हें न तो कोई अग्रिम सूचना दी गई और न ही उन्हें निकालने का कोई ठोस कारण बताया गया। यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के अभाव और मनमानी को दर्शाती है, जिससे सैकड़ों परिवारों का भविष्य अंधकारमय हो गया है।

    जिन लोगों को नौकरी से निकाला गया है, वे सभी अपनी सेवा के प्रति समर्पित थे और उन्होंने ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। ऐसे में बिना किसी ठोस कारण के उन्हें अचानक हटा देना न केवल उनके साथ अन्याय है, बल्कि यह श्रम कानूनों का भी स्पष्ट उल्लंघन प्रतीत होता है। यह स्थिति शहर में अन्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के बीच भी भय और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर रही है।

    विधायक सरयू राय की शरण में पीड़ित गार्ड्स

    अपनी पीड़ा लेकर ये नौकरी से निकाले गए सिक्योरिटी गार्ड्स रविवार को जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय से मिलने उनके आवास पर पहुंचे। उनके साथ असंगठित क्षेत्र के मजदूर प्रकोष्ठ के प्रतिनिधि अमित शर्मा भी मौजूद थे, जिन्होंने इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। गार्ड्स ने विधायक सरयू राय को अपनी आपबीती सुनाई, जिसमें उनकी आर्थिक कठिनाइयों और भविष्य की चिंताओं का जिक्र था। उन्होंने विधायक से इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और उनकी नौकरी वापस दिलाने में मदद करने की अपील की।

    विधायक सरयू राय ने गार्ड्स की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उन्हें आश्वासन दिया कि वह इस मामले को देखेंगे। उन्होंने कहा कि वह संबंधित एजेंसी सीआईएसएस और भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State Bank of India) के अफसरों से बात करेंगे। सरयू राय का यह हस्तक्षेप गार्ड्स के लिए उम्मीद की एक किरण लेकर आया है, क्योंकि वे एक प्रभावशाली व्यक्ति से मदद की उम्मीद कर रहे हैं। अमित शर्मा ने आगे बताया कि विधायक सोमवार को सिक्योरिटी एजेंसी सीआईएसएस के दीपक जी से सीधे बात करेंगे, ताकि इस मुद्दे का जल्द से जल्द समाधान निकाला जा सके।

    सीआईएसएस का आगमन और छंटनी का दौर

    अमित शर्मा ने इस बात पर भी जोर दिया कि पहले भी भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम के लिए सिक्योरिटी एजेंसियां बदलती थीं, लेकिन उस दौरान कर्मचारियों को इस तरह से बड़े पैमाने पर नौकरी से नहीं निकाला जाता था। पूर्व में एजेंसियां बदलने पर भी पुराने कर्मचारियों को नई एजेंसी में समायोजित कर लिया जाता था, जिससे उनकी नौकरी पर कोई आंच नहीं आती थी। हालांकि, इस बार जब से सीआईएसएस नामक कंपनी ने कार्यभार संभाला है, तब से ही बड़े पैमाने पर लोगों की छंटनी चालू हो गई है। यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति है, जो यह दर्शाती है कि नई एजेंसी कर्मचारियों के हितों की अनदेखी कर रही है।

    छंटनी के साथ-साथ, नई एजेंसी पर यह भी आरोप है कि वह नए कर्मचारियों को कम सैलरी पर रख रही है। यह पुराने, अनुभवी कर्मचारियों को हटाने और उनकी जगह कम वेतन पर नए लोगों को रखकर अपनी लागत कम करने की रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है। यह प्रथा न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि यह अनुभवी कार्यबल के मनोबल को भी गिराती है और श्रम बाजार में अस्थिरता पैदा करती है। यह कम वेतन पर रखे जा रहे लोगों के लिए भी शोषण का एक रूप है, क्योंकि वे समान कार्य के लिए कम भुगतान प्राप्त कर रहे हैं।

    नौकरी जाने का मानवीय मूल्य: एक दुखद घटना

    इस पूरे घटनाक्रम का एक अत्यंत दुखद और मानवीय पहलू भी सामने आया है। अमित शर्मा ने बताया कि एक सिक्योरिटी गार्ड के पति का निधन इसलिए हो गया, क्योंकि उन्हें अपनी पत्नी की नौकरी जाने का डर सता रहा था। उन्हें यह चिंता थी कि जैसे बाकी लोगों की नौकरी जा रही है, वैसे ही कहीं उनकी पत्नी की भी नौकरी न चली जाए। यह भय और चिंता इतनी गहरी थी कि उक्त सज्जन इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाए।

    अमित शर्मा के अनुसार, उक्त सज्जन की मृत्यु सदमा लगने से हुई है। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि नौकरी छूटना केवल एक आर्थिक समस्या नहीं है, बल्कि इसका गहरा मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक प्रभाव भी होता है। नौकरी की अनिश्चितता और भविष्य की चिंताएं लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती हैं, जैसा कि इस दुखद मामले में देखा गया। यह घटना नियोक्ताओं और संबंधित अधिकारियों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि उनके फैसलों का कर्मचारियों के जीवन पर कितना गहरा असर पड़ता है।

    न्याय और समाधान की उम्मीद

    विधायक सरयू राय का इस मामले में हस्तक्षेप पीड़ित सिक्योरिटी गार्ड्स के लिए न्याय की उम्मीद जगाता है। उनकी बातचीत और प्रयासों से यह उम्मीद की जा रही है कि इस समस्या का कोई उचित समाधान निकल पाएगा। गार्ड्स का मानना है कि उनकी लंबी सेवा और वफादारी को देखते हुए उन्हें पुनः नौकरी पर रखा जाना चाहिए या कम से कम एक सम्मानजनक विच्छेद वेतन प्रदान किया जाना चाहिए। यह मामला असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के महत्व को भी उजागर करता है।

    इस स्थिति में, भारतीय स्टेट बैंक की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह अपनी सेवाएँ प्रदान करने वाली एजेंसियों द्वारा अपनाए जा रहे श्रम प्रथाओं की निगरानी करे। बैंक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके साथ काम करने वाली एजेंसियां ​​नैतिक और कानूनी श्रम मानकों का पालन करें। यह केवल इन सिक्योरिटी गार्ड्स को निकाला जाने का मामला नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक और आर्थिक न्याय का प्रश्न है। [INTERNAL_LINK_HOLDER]

    यह देखना होगा कि सरयू राय की मध्यस्थता से क्या परिणाम निकलते हैं और क्या इन 100 से अधिक सिक्योरिटी गार्ड्स को न्याय मिल पाता है। यह घटना देशभर में ऐसी ही अन्य छंटनियों और श्रम शोषण के मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकती है, जो भविष्य में ऐसे कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई में एक नजीर साबित होगी।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleमुंबई में सोने की तस्करी: 5 करोड़ की खेप जब्त, BJP नेता गिरफ्तार
    Next Article पटना में कोचिंग वॉर: छात्रों का भविष्य दांव पर!

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    दैनिक पंचांग एवं राशिफल: 08 जून 2026, शुभ-अशुभ मुहूर्त

    झारखंड में नितिन नवीन का स्वागत: संगठन को नई दिशा

    पटना में कोचिंग वॉर: छात्रों का भविष्य दांव पर!

    जमशेदपुर: 100+ ATM सिक्योरिटी गार्ड्स को निकाला, सरयू राय मदद को आगे

    मुंबई में सोने की तस्करी: 5 करोड़ की खेप जब्त, BJP नेता गिरफ्तार

    ब्रेन ट्यूमर: नई उम्मीदें, बेहतर उपचार और समय पर पहचान

    जीवन की कीली: तनाव मुक्त रहने का अद्भुत रहस्य

    भाजपा में सोशल मीडिया की प्रभावी भूमिका: नितिन नवीन ने सराहा

    भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने संगठनात्मक बैठक में सोशल मीडिया की प्रभावी भूमिका को सराहा, दिनेश कुमार का किया उल्लेख।

    गर्भवती महिला और अजन्मे बच्चे की मौत मामले में बड़ी कार्रवाई, मेदांता हॉस्पिटल सील

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.