गांव बचेगा तो देश बढ़ेगा: गडकरी के बयान के दूरगामी मायने
देवानंद सिंह
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का यह बयान कि युवाओं, किसानों और मजदूरों का पलायन रोकने के लिए ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार सृजन जरूरी है, केवल एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं बल्कि देश की जमीनी हकीकत का स्पष्ट स्वीकार है। वर्षों से गांवों से शहरों की ओर हो रहा पलायन भारत की सबसे बड़ी सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों में शामिल है। ऐसे में गडकरी ने जिस गंभीरता से इस मुद्दे को उठाया है, उसके व्यापक मायने हैं।
आज गांवों में खेती लागत का सौदा बनती जा रही है। खेती पर निर्भर परिवारों की आय सीमित है, रोजगार के वैकल्पिक साधन कम हैं और युवाओं के सामने भविष्य की स्पष्ट दिशा नहीं है। परिणामस्वरूप गांव का युवा बेहतर अवसरों की तलाश में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और पुणे जैसे महानगरों की ओर निकल पड़ता है। यह पलायन केवल व्यक्ति का स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमजोरी का संकेत है।
शहरों की स्थिति भी इससे बेहतर नहीं होती। अनियोजित पलायन से महानगरों पर आबादी का दबाव बढ़ता है, झुग्गियां फैलती हैं, यातायात और प्रदूषण की समस्या गहराती है तथा संसाधनों पर बोझ बढ़ता है। यानी गांव कमजोर होते हैं और शहर भी असंतुलित होते जाते हैं।
गडकरी ने किसानों को ‘अन्नदाता’ से ‘ऊर्जादाता’ बनने की बात कही है। यह सोच भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़ी हुई है। जैव ईंधन, एथेनॉल, बायोगैस, बांस आधारित उद्योग और कृषि प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं। यदि किसान केवल अनाज उत्पादक न रहकर ऊर्जा, कच्चा माल और उद्योग से जुड़ें, तो उनकी आय में स्थायी वृद्धि संभव है।
बांस की खेती से करोड़ों रोजगार सृजित होने की बात भी महत्वपूर्ण है। पूर्वोत्तर, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और आदिवासी इलाकों में बांस आधारित उद्योग स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं। इससे पर्यावरण संरक्षण, रोजगार और उद्योग—तीनों को लाभ मिलेगा।
हालांकि केवल भाषणों से स्थिति नहीं बदलेगी। ग्रामीण रोजगार के लिए सड़क, बिजली, इंटरनेट, भंडारण, बाजार, कौशल प्रशिक्षण और छोटे उद्योगों का मजबूत नेटवर्क तैयार करना होगा। कृषि को बाजार से जोड़ना होगा और युवाओं को गांव में ही सम्मानजनक रोजगार देना होगा।
गडकरी का बयान नीति निर्माताओं के लिए संकेत है कि भारत का भविष्य केवल स्मार्ट सिटी में नहीं, बल्कि स्मार्ट गांवों में भी छिपा है। यदि गांव मजबूत होंगे, किसान समृद्ध होंगे और युवाओं को स्थानीय अवसर मिलेंगे, तभी संतुलित विकास संभव होगा। गांव बचेगा तो देश बढ़ेगा।

