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    क्या किसी दल की विरासत बनकर रह गए शहीद रति लाल महतो?

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarJuly 13, 2026No Comments2 Mins Read
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    क्या किसी दल की विरासत बनकर रह गए शहीद रति लाल महतो?

    मृत्युंजय बर्मन
    राष्ट्र संवाद संवाददाता
    गम्हरिया शहीद रति लाल महतो के 27वें शहादत दिवस पर गम्हरिया में आयोजित समारोह का निमंत्रण पत्र इस बार चर्चा का विषय बन गया है। “शहीद रतिलाल महतो स्मृति रक्षा समिति” के नाम से जारी आमंत्रण पत्र में मुख्य रूप से झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़े नेताओं को आमंत्रित किया गया है। इससे स्थानीय लोगों और पुराने आंदोलनकारियों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या मजदूर आंदोलन और झारखंड आंदोलन के इस जननायक की विरासत अनजाने में किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित होती जा रही है।

    लोगों का कहना है कि रति लाल महतो का संघर्ष किसी दल के लिए नहीं, बल्कि मजदूरों, विस्थापितों और झारखंड की अस्मिता के लिए था। इसलिए उनके शहादत दिवस का मंच भी सर्वदलीय होना चाहिए। पहले के वर्षों में विभिन्न दलों के नेता भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होते रहे हैं।

    हालांकि, झामुमो प्रखंड अध्यक्ष भोंमरा माझी ने कहा कि श्रद्धांजलि कार्यक्रम और फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन झामुमो कर रहा है, इसलिए पार्टी के नेताओं को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “नेताजी पर श्रद्धा रखने वाला कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी दल का हो, कार्यक्रम में आकर श्रद्धांजलि अर्पित कर सकता है। किसी प्रकार की कोई रोक-टोक नहीं है।”

    इसके बावजूद स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि शहीद रति लाल महतो पूरे झारखंड और मजदूर समाज की साझा विरासत हैं। इसलिए भविष्य में उनके सम्मान में होने वाले आयोजनों को सर्वदलीय स्वरूप दिया जाना ही उनके संघर्ष के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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