लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
श्रावण मास के अमवस्या के पावन अवसर पर जमशेदपुर के बर्मामाइन्स स्थित इस्ठ प्लांट बस्ती में श्री श्री दक्षिणेश्वरी काली मंदिर में भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दिव्य अवसर पर मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा जहां सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मां काली के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। सनातन परंपरा में श्रावण मास की अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है, विशेषकर शक्ति उपासना के लिए यह तिथि अत्यंत फलदायी होती है। मान्यता है कि इस दिन मां काली की पूजा-अर्चना करने से समस्त बाधाएं दूर होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
श्रावण माह भगवान शिव को समर्पित है, किंतु शक्ति स्वरूपा मां काली की आराधना इस मास में विशेष फलदायी मानी गई है। शास्त्रों में उल्लेख है कि जहां मां काली विराजमान होती हैं, वहां भगवान शिव स्वयं उपस्थित रहते हैं। इस पावन संयोग पर मंदिर कमिटी द्वारा विशेष तैयारियां की गई थीं। मंदिर परिसर को फूलों और विद्युत झालरों से सजाया गया था। प्रातःकाल से ही भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। सुरक्षा व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे ताकि दर्शनार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
श्रावण मास के अमवस्या पर संपन्न हुई भव्य पूजा
राष्ट्र संवाद संवाददाता जमशेदपुर। क्षी क्षी दक्षिणेश्वरी काली मंदिर, इस्ठ प्लांट बस्ती, बर्मामाइन्स में बुधबार को श्रावण मास के अमवस्या के अवसर पर पूरे विधि विधान से पूजा संपन्न हुआ।
इस अवसर पर मां काली का स्नान एवं भव्य श्रृंगार किया गया।
पूरोहीत विश्वजीत द्वारा पूजा संपन्न कराया गया।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं के बीच भोग प्रसाद का वितरण भी किया गया।
मौके पर मंदिर कमिटी के अध्यक्ष गलविंदर सिंह ग्वाले ने बताया कि सनातन धर्म में श्रावण मास का बहुत महत्व होता हैं।
पूरे श्रावण मास में लोग मांसाहारी भोजन का त्याग कर भगवान भोले की अराधाना करते है।
और जहां मां काली होती है वहां तो भोले भंडारी शिव स्वंय विराजमान होते हैं।
ऐसे में आज के दिन की मां काली का वड़ा महत्व है।
इस आयोजन को सफल बनाने में कमिटी के सभी सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
पूजा संपन्न होने के पश्चात महाआरती का आयोजन किया गया जिसमें भारी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए। ढाक की ध्वनि और शंखनाद से वातावरण गुंजायमान हो उठा। भोग प्रसाद ग्रहण करने के लिए श्रद्धालु देर शाम तक मंदिर परिसर में डटे रहे। मंदिर कमिटी के सदस्यों ने व्यवस्था संभालने में दिन-रात एक कर दिया। इस धार्मिक आयोजन ने क्षेत्र में सामाजिक समरसता और भक्ति भावना का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। श्रावण मास के धार्मिक महत्व के बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया पर श्रावण मास देखें।
मंदिर के पुजारी ने बताया कि अमावस्या तिथि पर मां काली की पूजा तंत्र-मंत्र की दृष्टि से भी अत्यंत शुभ मानी जाती है। भक्तों ने मां से सुख-समृद्धि और आरोग्यता की कामना की। इस अवसर पर स्थानीय गणमान्य नागरिकों सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे उपस्थित थे। आयोजन की सफलता पर मंदिर कमिटी ने सभी भक्तों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

