कांग्रेस की सीडब्ल्यूसी बैठक से 2 महीने बाद बदलाव का इशारा
राष्ट्र संवाद संवाददाता
पटना:चुनाव से पहले बिहार की राजनीति में गरमाहट बढ़ गई है। एक तरफ कांग्रेस ने अपनी सीडब्ल्यूसी बैठक में महागठबंधन की सरकार बनने के संकेत दिए, तो दूसरी तरफ ओवैसी और प्रशांत किशोर सीमांचल में मुस्लिम वोटरों को साधने के लिए सक्रिय नजर आए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इस बार चुनाव में मुस्लिम वोट बैंक पर उम्मीद लगाए बैठे हैं।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) की बैठक ने बिहार में राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। तेलंगाना विधानसभा चुनाव से ठीक 2 महीने पहले सीडब्ल्यूसी बैठक के बाद वहां कांग्रेस सरकार बनी थी। इसी तर्ज पर महासचिव जयराम रमेश ने कहा,
बिहार में भी हमने चुनाव से ठीक 2 महीने पहले सीडब्ल्यूसी बैठक की है। हम उम्मीद करते हैं कि 2 महीने बाद बिहार में महागठबंधन की सरकार होगी।
बिहार में अक्टूबर-नवंबर में 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। कांग्रेस इस बार नीतीश सरकार को हराकर सत्तासीन होने की तैयारी में है।
राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि पटना में सम्मेलन का आयोजन इसलिए किया गया कि इसकी आवाज़ पूरे देश में पहुँचे। उन्होंने राजधानी पटना को ऐतिहासिक धरती बताते हुए कहा कि यहीं से कई क्रांतियाँ हुई हैं।
तेलंगाना की तर्ज पर बिहार में भी सत्ता परिवर्तन की संभावना जताई जा रही है।
महागठबंधन की ताकत और गठबंधन समीकरण तय करने में इस बैठक का राजनीतिक महत्व बढ़ा है।
अक्टूबर-नवंबर विधानसभा चुनाव में इस बैठक के संकेत वोटरों के मनोविज्ञान पर असर डाल सकते हैं।
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दूसरी तरफ सीमांचल में ओवैसी और प्रशांत किशोर सक्रिय नजर आए। ओवैसी ने कहा कि लालटेन ने गद्दारों को अपने साथ मिलाया है, जबकि किशोर ने कहा,
“दलितों के बाद अगर सबसे ज्यादा परेशानी में है तो वह है मुसलमान।”
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सीमांचल में मुस्लिम और दलित वोटरों को साधना दोनों पक्षों के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

