लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
सावन के पावन महीने में जमशेदपुर शहर ने एक बार फिर गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल पेश की है, जहां धार्मिक आस्था और आपसी भाईचारे का अद्भुत संगम देखने को मिला।
गंगा-जमुनी तहजीब की जीवंत मिसाल
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर: सावन माह के पावन अवसर पर शहर में गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल देखने को मिली। अखिल भारतीय कांग्रेस के जिला महासचिव शाहनवाज अहमद ने बाबा बैद्यनाथ सेवा संघ की निशुल्क कांवर यात्रा के संयोजक विकास सिंह को अपने प्रतिष्ठान पर आमंत्रित कर कांवर यात्रा के लिए गेरुआ वस्त्र भेंट किए।
शाहनवाज अहमद ने कहा कि धार्मिक कार्य आपसी भाईचारे और सौहार्द से ही मजबूत होते हैं। वहीं, विकास सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि गंगा-जमुनी तहजीब केवल पुस्तकों में ही नहीं, बल्कि समाज में भी जीवंत रूप में देखने को मिल रही है।
गौरतलब है कि बाबा बैद्यनाथ सेवा संघ की ओर से विकास सिंह के नेतृत्व में करीब 1000 महिला एवं पुरुष शिवभक्तों के लिए जमशेदपुर से सुल्तानगंज तक निशुल्क कांवर यात्रा का आयोजन किया जाता है, जिसमें श्रद्धालुओं को सात दिनों तक आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
सावन माह और कांवर यात्रा का धार्मिक महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार सावन माह भगवान शिव की उपासना के लिए सर्वाधिक पवित्र माना जाता है। इस महीने में लाखों शिवभक्त कांवर यात्रा निकालकर पवित्र नदियों से जल लाकर शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग इस यात्रा का प्रमुख केंद्र है, जहां सुल्तानगंज से गंगाजल लाकर चढ़ाने की परंपरा सदियों पुरानी है। बाबा बैद्यनाथ सेवा संघ जैसी संस्थाएं इस कठिन पैदल यात्रा को सुगम बनाने के लिए निशुल्क भोजन, विश्राम, चिकित्सा और परिवहन की व्यवस्था करती हैं।
शाहनवाज अहमद का सांप्रदायिक सौहार्द में योगदान
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के जिला महासचिव शाहनवाज अहमद लंबे समय से जमशेदपुर में सामाजिक समरसता के लिए कार्यरत हैं। उनका यह कदम न केवल धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक है, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत भी है। उन्होंने अपने प्रतिष्ठान पर विकास सिंह का सम्मान करते हुए कहा कि “धार्मिक कार्य आपसी भाईचारे और सौहार्द से ही मजबूत होते हैं”। यह विचारधारा भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत को मजबूती प्रदान करती है।
विकास सिंह और बाबा बैद्यनाथ सेवा संघ की सेवाएं
विकास सिंह के नेतृत्व में बाबा बैद्यनाथ सेवा संघ विगत कई वर्षों से विशाल स्तर पर कांवर यात्रा का संचालन कर रहा है। इस वर्ष लगभग 1000 श्रद्धालुओं के जत्थे के लिए सात दिनों की व्यापक व्यवस्था की गई है। संघ द्वारा श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क भोजन, पेयजल, चिकित्सा शिविर, विश्राम स्थल और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं। इस यात्रा में महिलाओं और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखा जाता है, जिससे उनकी आध्यात्मिक यात्रा निर्विघ्न संपन्न हो सके।
गंगा-जमुनी तहजीब: भारत की साझी विरासत
गंगा-जमुनी तहजीब शब्द भारत की उस समृद्ध परंपरा को दर्शाता है जहां हिंदू और मुस्लिम संस्कृतियों का सहअस्तित्व सदियों से फल-फूल रहा है। यह केवल धार्मिक सहनशीलता नहीं, बल्कि एक-दूसरे के रीति-रिवाजों में सक्रिय भागीदारी और सम्मान का नाम है। जमशेदपुर जैसे औद्योगिक नगर में, जहां विविध समुदाय निवास करते हैं, ऐसी पहल सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करती हैं। इतिहास गवाह है कि सूफी संतों और भक्ति आंदोलन के कवियों ने इस तहजीब को सींचा है। आज भी शाहनवाज अहमद जैसे नेता इस परंपरा को जीवंत बनाए हुए हैं।
समाजशास्त्रियों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से सामाजिक पूंजी का निर्माण होता है, जो संकट के समय समाज को जोड़े रखती है। गंगा-जमुनी तहजीब पर विस्तृत अध्ययन के लिए विकिपीडिया पृष्ठ देखें।
स्थानीय नागरिकों की प्रतिक्रिया
इस घटना पर स्थानीय नागरिकों ने हर्ष व्यक्त किया है। सामाजिक कार्यकर्ता रमेश कुमार ने कहा, “यह जमशेदपुर की असली पहचान है, जहां हर त्योहार मिलकर मनाया जाता है।” वहीं, शिक्षिका प्रिया शर्मा ने इसे “बच्चों के लिए जीवंत पाठ” बताया। सोशल मीडिया पर भी इस पहल की तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिन्हें हजारों लाइक्स और शेयर मिल चुके हैं।
निष्कर्ष: एकता की डोर से बंधा समाज
सावन में कांवर यात्रा के लिए गेरुआ वस्त्र भेंट करने का यह प्रसंग महज एक घटना नहीं, बल्कि उस भारत की तस्वीर है जहां आस्था के रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन मंजिल साझी मानवता और भाईचारा है। शाहनवाज अहमद और विकास सिंह की यह मुलाकात आने वाले समय में भी सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बनी रहेगी।

