गरीबों के चूल्हे पर डाका: मुंबई में एलपीजी सिलेंडर चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश
राष्ट्र संवाद संवाददाता
मुंबई (इंद्र यादव) एक तरफ दुनिया जंग की आग में झुलस रही है, जिसकी तपिश भारत के रसोई घरों तक पहुँच चुकी है, और दूसरी तरफ कुछ अपराधी गरीबों के मुँह का निवाला छीनने में लगे हैं। मुंबई की पवई पुलिस ने एक ऐसे ही शातिर गिरोह को दबोचा है, जो गैस किल्लत के इस दौर में सिलेंडर चोरी कर उन्हें ऊँचे दामों पर बेच रहा था।
युद्ध की मार और ऊपर से ‘अपनों’ का प्रहार
ईरान-इजरायल तनाव के चलते एलपीजी की सप्लाई में पहले ही भारी कमी आई है। ऐसे में एक आम आदमी के लिए गैस सिलेंडर जुटाना किसी जंग जीतने जैसा हो गया है। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर राज चंद्रकांत कांबले नाम का आरोपी और उसके साथी शहर में ‘सिलेंडर संकट’ को अपनी कमाई का जरिया बना चुके थे।
पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी
पवई पुलिस की क्राइम डिटेक्शन यूनिट ने एक विशेष ऑपरेशन चलाकर इस रैकेट का भंडाफोड़ किया। पुलिस की इस मुस्तैदी से जो सच सामने आया, वो चौंकाने वाला है.
कुल बरामदगी: 45 चोरी के एलपीजी सिलेंडर।
अन्य सामान: चोरी की 3 मोटरसाइकिलें (जिनका इस्तेमाल वारदात को अंजाम देने में होता था)।
कार्यक्षेत्र: आरोपी मुंबई, नवी मुंबई और ठाणे जैसे इलाकों में सक्रिय था।
मजबूरी का सौदा
पकड़ा गया मुख्य आरोपी ठाणे के वर्तकनगर का रहने वाला है। वह अपने दो साथियों की मदद से उन इलाकों को निशाना बनाता था जहाँ गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार रहते हैं। एक तरफ जहाँ गरीब आदमी हफ्तों तक सिलेंडर का इंतज़ार करता है, वहीं ये अपराधी रात के अंधेरे में उनके हक़ पर डाका डालते थे और बाद में उसी सिलेंडर को कालाबाजारी के जरिए मोटी रकम पर बेच देते थे।
“जब पूरी दुनिया संकट में है, तब इस तरह की चोरी सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि उन गरीबों के साथ क्रूरता है जो बमुश्किल अपना पेट पाल रहे हैं।”
फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस रैकेट के तार और कहाँ-कहाँ जुड़े हैं। इस गिरफ्तारी से कम से कम उन 45 परिवारों को राहत की उम्मीद जगी है, जिनके हक की रसोई इन चोरों ने छीन ली थी।

