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    Home » पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया सरहुल महापर्व
    जमशेदपुर झारखंड

    पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया सरहुल महापर्व

    Aman OjhaBy Aman OjhaMarch 14, 2026No Comments2 Mins Read
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    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रहे श्री अर्जुन मुंडा ने शुक्रवार को जमशेदपुर के घोड़ाबांधा स्थित अपने आवास पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सरहुल महापर्व मनाया। इस अवसर पर उन्होंने सपरिवार सरहुल पूजा-अर्चना कर प्रकृति, जल, जंगल और जमीन की रक्षा के साथ-साथ राज्य एवं देश की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण के लिए प्रार्थना की।

    पूजा के दौरान पारंपरिक आदिवासी रीति के अनुसार प्रकृति के प्रतीक सखुआ (साल) के फूलों के साथ विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान परिवार के सदस्यों के साथ श्रद्धा और आस्था के वातावरण में सरहुल पर्व की परंपराओं का निर्वहन किया गया।

    इस अवसर पर अर्जुन मुंडा ने कहा कि सरहुल पर्व झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, प्रकृति के प्रति गहरी आस्था और सामुदायिक एकता का जीवंत प्रतीक है। यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और जल, जंगल तथा जमीन की रक्षा करने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की परंपरा को निभाता आया है और सरहुल उसी परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक है।

    श्री मुंडा ने कहा कि आज पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण प्रदूषण, जंगलों की कटाई और जैव विविधता के संकट जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में सरहुल जैसे पारंपरिक पर्व हमें प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की सीख देते हैं। उन्होंने कहा कि यह पर्व हमें यह याद दिलाता है कि प्रकृति की रक्षा ही मानव जीवन के अस्तित्व की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

    उन्होंने आगे कहा कि सरहुल केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि हमारी जनजातीय परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति के साथ गहरे संबंध का प्रतीक है। यह पर्व समाज में पारस्परिक सद्भाव, सहयोग और एकता को मजबूत करता है तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है।

    अर्जुन मुंडा ने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा करना केवल आदिवासी समाज की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे समाज और मानवता की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की हमारी पारंपरिक संस्कृति आज वैश्विक पर्यावरण संकट के समाधान की दिशा में भी महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करती है।

    इस अवसर पर उन्होंने सभी राज्यवासियों को सरहुल महापर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए। उन्होंने लोगों से पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहने का भी आह्वान किया।

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