विकास के लिए जल स्त्रोतों के अस्तित्व की बलि
*तीन साल की शिकायतों के बावजूद जलस्रोत का बड़ा हिस्सा भराया फ्लाई ऐश से, जमीन के रिकॉर्ड में ‘मकान’ और ‘सरकारी बांध’ का पेच*
मृत्युंजय बर्मन
राष्ट्र संवाद संवाददाता, सरायकेला
आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में पारंपरिक जलस्रोतों के अस्तित्व पर संकट के बीच भुरकाड़ीह मौजा स्थित सदियों पुराने तालाब को फ्लाई ऐश से भर दिए जाने का मामला सामने आया है। श्रीपुरम सोसाइटी के समीप स्थित इस तालाब का वर्षों से स्थानीय लोग नहाने, कपड़े धोने, मवेशियों को पानी पिलाने और पूजा-पर्व में कलश यात्रा जैसे सामुदायिक कार्यों के लिए इस्तेमाल करते रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि करीब तीन वर्षों से शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की और अब तालाब का बड़ा हिस्सा भर दिया गया है।
*एक खाता, दो प्लॉट और उलझे राजस्व रिकॉर्ड*
मामले में खाता संख्या 27 के राजस्व अभिलेख सवालों के घेरे में हैं। उपलब्ध ऑनलाइन खतियान के अनुसार, इस खाते के 1.36 एकड़ के एक प्लॉट की प्रकृति ‘मकान’ दर्ज है, जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि वहां पुराना तालाब था। इसी खाते के दूसरे प्लॉट में जमीन की प्रकृति ‘अनावाद बिहार सरकार – ‘बांध’ दर्ज होने की जानकारी है। लेकिन मौके पर बांध का स्पष्ट अस्तित्व दिखाई नहीं देता। मूल खतियान और प्रमाणित अभिलेख सामने नहीं आने के कारण ऑनलाइन रिकॉर्ड में गड़बड़ी या छेड़छाड़ की आशंका की पुष्टि नहीं हुई है।
*निजी बताकर भरने से खत्म नहीं होती जवाबदेही*
गम्हरिया अंचलाधिकारी का कहना है कि संबंधित तालाब निजी था और उसे भर दिया गया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या निजी स्वामित्व के आधार पर वर्षों से सार्वजनिक उपयोग में रहे प्राकृतिक जलस्रोत को मनमाने ढंग से समाप्त किया जा सकता है? सर्वोच्च न्यायालय ने हिंच लाल तिवारी बनाम कमला देवी और जगपाल सिंह बनाम पंजाब राज्य जैसे मामलों में तालाबों एवं सामुदायिक जलस्रोतों के संरक्षण पर जोर दिया है।
*भरावट के लिए फ्लाई ऐश के उपयोग पर पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ ईशा बर्मन की टिप्पणी*
तालाबों को फ्लाई ऐश से भरना पर्यावरणीय संतुलन के लिए गंभीर खतरा है। तालाब वर्षाजल संचयन, भूजल पुनर्भरण, बाढ़ के दौरान अतिरिक्त पानी के भंडारण और जैव विविधता के संरक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं। फ्लाई ऐश के महीन कण और वर्षाजल के संपर्क में उससे होने वाला संभावित रिसाव मिट्टी, सतही जल व भूजल को प्रदूषित कर सकता है। इसलिए भराव से पहले वैज्ञानिक जोखिम आकलन और सुरक्षित इंजीनियर्ड फिलिंग अथवा स्वीकृत निष्क्रिय पुनर्चक्रित निर्माण सामग्री के विकल्पों पर विचार जरूरी है। जलस्रोतों की कीमत पर विकास दीर्घकाल में पर्यावरण और समाज, दोनों के लिए नुकसानदेह है।
*तीन साल की शिकायत, अब प्रशासनिक जांच की मांग*
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि मूल खतियान, पुराने राजस्व अभिलेख, नक्शा और जमाबंदी का मौके की स्थिति से मिलान कराया जाए। साथ ही यह पता लगाया जाए कि फ्लाई ऐश किसके निर्देश पर डाली गई और इसके लिए जरूरी अनुमतियां ली गई थीं या नहीं। भुरकाड़ीह में अब सवाल सिर्फ एक तालाब के भराव का नहीं, बल्कि जलस्रोतों के संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही का है।

