पर्यावरण दिवस: धरती बचाने का संकल्प और हमारी जिम्मेदारी — सुल्तान अली
राष्ट्र संवाद संवादाता
हर वर्ष 5 जून को विश्वभर में पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। यह दिन केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारे कर्तव्यों की याद दिलाने वाला एक महत्वपूर्ण अवसर है। आज जब विकास की दौड़ में हम लगातार आगे बढ़ रहे हैं, तब यह सोचना आवश्यक हो गया है कि कहीं हम अपनी ही जीवनदायिनी प्रकृति से दूर तो नहीं होते जा रहे हैं।
पर्यावरण असंतुलन का सीधा प्रभाव जलवायु परिवर्तन के रूप में सामने आ रहा है। कहीं अत्यधिक वर्षा तो कहीं सूखा, कहीं तापमान में असामान्य वृद्धि तो कहीं प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाएँ—ये सभी संकेत हैं कि प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है। यदि समय रहते इस दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए गए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
पर्यावरण का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। पेड़ हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, नदियाँ जीवन और कृषि का आधार हैं, मिट्टी हमें भोजन देती है और स्वच्छ व संतुलित पर्यावरण ही पृथ्वी को रहने योग्य बनाता है। लेकिन आज बढ़ते औद्योगिकीकरण, शहरीकरण, प्रदूषण और वनों की कटाई ने इस संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, अनियमित वर्षा और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती संख्या इसी असंतुलन का परिणाम है। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ पृथ्वी छोड़ना कठिन हो जाएगा।
हिंदी साहित्य में प्रकृति हमेशा से कवियों की प्रेरणा रही है। सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की यह पंक्ति प्रकृति के प्रति गहरे सम्मान और उसके महत्व को दर्शाती है कि _“तोड़ो मत, यह प्रकृति का उपहार है, इसमें ही जीवन का आधार है।”_ यह केवल एक काव्यात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक गहरी चेतावनी भी है कि यदि हमने प्रकृति को नुकसान पहुँचाया तो जीवन का आधार ही संकट में पड़ जाएगा।
इसी प्रकार मशहूर शायर बशीर बद्र की एक पंक्ति आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक प्रतीत होती है, जिसमें वे मानवीय जीवन की भाग-दौड़ के बीच प्रकृति की शांति और सुकून को रेखांकित करते हैं कि _“कितनी दूर निकल आए हम रिश्तों की तलाश में, पर अब भी सुकून मिलता है पेड़ों की छाँव में।”_ यह पंक्ति हमें याद दिलाती है कि आधुनिकता की दौड़ में भी प्रकृति ही वह स्थान है जहाँ मनुष्य को वास्तविक शांति प्राप्त होती है
पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों या संगठनों की ही जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक का कर्तव्य है। यदि हम छोटे-छोटे कदम भी उठाएँ तो बड़ा परिवर्तन संभव है। अधिक से अधिक पेड़ लगाना, पानी की बचत करना, प्लास्टिक का उपयोग कम करना, ऊर्जा का संयमित उपयोग करना और प्रकृति के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाना—ये सभी प्रयास हमारे पर्यावरण को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अंततः यह समझना आवश्यक है कि प्रकृति केवल संसाधनों का भंडार नहीं है, बल्कि हमारे जीवन का आधार है। यदि हम इसे सुरक्षित रखेंगे तो यह हमें भी सुरक्षित रखेगी। वास्तव में धरती का संरक्षण ही मानवता का संरक्षण है, और यही संदेश विश्व पर्यावरण दिवस हमें हर वर्ष देता है।
सादर,
*सुल्तान अली*
_लेखक एवं अध्यापक_
पूर्व छात्र, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश)

