दिल्ली. केंद्र सरकार ने आज से टूटे चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है. डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड संतोष कुमार सारंगी की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि आज आनी 9 सितंबर 2022 से ब्रोकन राइस यानी टूटे चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लागू हो गया है.
बताया जा रहा है कि देश के कई इलाकों में कम बारिश की वजह से इस साल चावल का उत्पादन प्रभावित हो सकता है. इसी स्थिति के मद्देनजर भारत में अब खाद्य सुरक्षा की रक्षा के लिए गेहूं और चीनी के बाद टूटे चावल के निर्यात को भी प्रतिबंधित किया गया है. कृषि मंत्रालय के अनुसार दुनिया के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक दक्षिण एशियाई देश भारत में चावल का कुल रकबा इस सीजन में अब तक 12 प्रतिशत तक गिर गया है.
गौरतलब है कि भारत का वैश्विक चावल व्यापार का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा है. भारत ने इसी साल मई में गेहूं के शिपमेंट पर यह कहते हुए प्रतिबंध लगा दिया था कि देश की खाद्य सुरक्षा खतरे में है, क्योंकि कई राज्यों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की वजह से गेहूं की पैदावार कम हुई थी. भारत ने अपनी खाद्य आपूर्ति की सुरक्षा के लिए चीनी निर्यात पर भी रोक लगा दी थी.
कृषि मंत्रालय ने कहा था कि धान का रकबा 12 अगस्त तक गिरकर 30.98 मिलियन हेक्टेयर रह गया है, जो एक साल पहले 35.36 मिलियन हेक्टेयर था. हालांकि गन्ने के लिए आवंटित क्षेत्र 5.45 मिलियन से बढ़कर 5.52 मिलियन हेक्टेयर हो गया. गौरतलब है कि भारत से होने वाले चावल के कुल निर्यात में टूटे चावल की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है और दुनिया के कुल चावल व्यापार में भारत की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत है.

