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    Home » राजस्थान में गहरा भू-जल संकट: फ्लोराइड से बढ़ा स्वास्थ्य खतरा
    खबरें राज्य से

    राजस्थान में गहरा भू-जल संकट: फ्लोराइड से बढ़ा स्वास्थ्य खतरा

    Nikunj GuptaBy Nikunj GuptaMay 24, 2026No Comments2 Mins Read
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    राजस्थान में भू-जल स्तर में लगातार गिरावट और पानी में फ्लोराइड की बढ़ती मात्रा गंभीर चिंता का विषय बन गई है। भाजपा नेता विजय सिंह बैंसला की भेद्यता विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार राज्य में भू-जल संकट अब “संरचनात्मक” रूप ले चुका है। वर्ष 2022 में भू-जल निकासी प्राकृतिक पुनर्भरण के 151 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि अत्यधिक दोहन वाले भू-जल ब्लॉकों की संख्या 219 हो गई है।

    रिपोर्ट में बताया गया कि मॉनसून पूर्व भू-जल गहराई 2015 के 24.5 मीटर से बढ़कर 2024 में 28.8 मीटर हो गई है। नागौर, बाड़मेर, जालौर, जोधपुर, सीकर और झुंझुनूं जैसे जिलों में फ्लोराइड का स्तर तय मानकों से कई गुना अधिक पाया गया। नागौर में फ्लोराइड 5.8 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज हुआ, जो सुरक्षित सीमा से लगभग चार गुना ज्यादा है।

    फ्लोराइड युक्त पानी के कारण डेंटल और स्केलेटल फ्लोरोसिस, हड्डियों की क्षति, गुर्दे की बीमारी और हृदय संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। प्रभावित जिलों में शिशु मृत्यु दर भी अधिक दर्ज की गई है।

    रिपोर्ट में भू-जल पुनर्भरण, फ्लोराइड निष्कासन संयंत्र, चेक डैम, जल संरक्षण और ड्रिप सिंचाई जैसी योजनाओं को प्राथमिकता देने की सिफारिश की गई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में जल संकट और स्वास्थ्य समस्याएं और गंभीर रूप ले सकती हैं।

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