जमशेदपुर,सवर्णों के लिए संघर्ष का पर्याय बन चुके और संस्थागत रूप से पार्टीगत भागेदारी के लिये निरंतर संघर्ष कर रहे डी डी त्रिपाठी को ” सवर्ण महा संघ फाउंडेशन इंडिया ” ने अपना राष्ट्रीय महामंत्री सह झाड़खण्ड प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया हैं ।
त्रिपाठी ने अपनी नियुक्ति के बाद विश्वास जताया कि इससे स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ज़िस तरह भारतीय संस्कृति एवं इतिहास के गौरव को मुगलों एवं अन्य आक्रांताओ के बोझ तले दबाने का प्रयास एक सोची समझी साजिश के तहत की गई! उसी तरह राजनैतिक रूप से सवर्णों को पार्टीगत हिस्सेदारी से वंचित रखकर उनके बौद्धिक एवं राष्ट्रीयता के मूल सोंच को खंडित करने का कुचक्र रचा गया हैं। काँग्रेस ने कभी भी नहीं चाहा कि राष्ट्रवाद एवं सनातन संस्कृति का इस राष्ट्र पर प्रभाव बढ़े।इसलिए सभी वर्गों के लिए पार्टीगत संगठनात्मक भागीदरी तो सुनिश्चित की किन्तु सवर्णों को इससे दूर रखा।”संघे शक्ति कलियुगे ” की अवधारणा को सवर्णों के लिए अप्राप्य बना दिया गया।जिसका नुकसान राष्ट्रवादी ताकतों को पोषित करने वाले सवर्णों को बराबर उठाना पड़ा हैं जो आज खंडित हो कर धीरे धीरे अपने अस्तित्व की लड़ाई तक पहुँच चुके हैं जो कभी सांस्कृतिक एवं ऎतिहासिक त्याग के पर्याय थे।
त्रिपाठी ने कहा कि अब हमें हर हाल में अन्य समुदायों की तरह ही सवर्ण मोर्चा के रूप में पार्टीगत भागेदारी चाहिए और इसकी शुरूआत विश्व की सबसे बड़ी एवं देश का नेतृत्व कर रही पार्टी भाजपा से हो हम इसकी आशा करते हैं।
और यदि ऐसा नहीं होता हैं तो संगठित रूप से विकल्प की लड़ाई हम पूरे भारत वर्ष में लड़ने को तैयार हैं। त्रिपाठी ने विश्वास व्यक्त किया कि संगठनात्मक रूप से मिला ये सम्मान सवर्णों के लिए उनके संघर्ष की राह को आसान बनाएगा। इसके लिए शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार प्रकट किया।
ज्ञात हो कि श्री त्रिपाठी इसके पहले भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जे पी नड्डा जी एवं प्रधानमंत्री जी को पत्र लिखकर सवर्णों की पार्टीगत भागेदारी सुनिश्चित करने की दिशा में पहल की मांग कर चुके हैं !

