लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर के बर्मामाइन्स स्थित दक्षिणेश्वरी काली मंदिर में श्रावण मास की अमावस्या के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।
दक्षिणेश्वरी काली मंदिर में हुआ भव्य श्रृंगार और पूजन
क्षी क्षी दक्षिणेश्वरी काली मंदिर, इस्ठ प्लांट बस्ती, बर्मामाइन्स में बुधबार को श्रावण मास के अमवस्या के अवसर पर पूरे विधि विधान से पूजा संपन्न हुआ।
इस अवसर पर मां काली का स्नान एवं भव्य श्रृंगार किया गया।
पूरोहीत विश्वजीत द्वारा पूजा संपन्न कराया गया।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं के बीच भोग प्रसाद का वितरण भी किया गया।
मौके पर मंदिर कमिटी के अध्यक्ष गलविंदर सिंह ग्वाले ने बताया कि सनातन धर्म में श्रावण मास का बहुत महत्व होता हैं।
पूरे श्रावण मास में लोग मांसाहारी भोजन का त्याग कर भगवान भोले की अराधाना करते है।
और जहां मां काली होती है वहां तो भोले भंडारी शिव स्वंय विराजमान होते हैं।
ऐसे में आज के दिन की मां काली का वड़ा महत्व है।
इस आयोजन को सफल बनाने में कमिटी के सभी सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
श्रावण मास में मां काली की पूजा का विशेष महत्व
श्रावण मास को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस महीने में भगवान शिव की आराधना के साथ-साथ मां काली की उपासना का भी विशेष विधान है। मान्यता है कि दक्षिणेश्वरी काली मंदिर जैसे सिद्ध पीठों में अमावस्या के दिन पूजा-अर्चना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर के पुजारी विश्वजीत ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ माता का अभिषेक और श्रृंगार संपन्न कराया, जिसका अलौकिक दृश्य देखते ही बन रहा था।
भोग प्रसाद वितरण और भक्तों की आस्था
पूजा संपन्न होने के बाद मंदिर कमिटी की ओर से विशाल भोग प्रसाद का आयोजन किया गया। सैकड़ों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने माता का प्रसाद ग्रहण किया। गलविंदर सिंह ग्वाले ने बताया कि मंदिर कमिटी लंबे समय से इस आयोजन की तैयारी कर रही थी। उन्होंने कहा कि मां काली और भगवान शिव का अटूट संबंध है, जहां मां काली विराजती हैं, वहां महादेव स्वयं उपस्थित रहते हैं। इसीलिए श्रावण अमावस्या पर यहां पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
मंदिर का इतिहास और स्थानीय मान्यता
बर्मामाइन्स स्थित यह मंदिर जमशेदपुर के प्रमुख शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। स्थानीय निवासियों की गहरी आस्था इस मंदिर से जुड़ी हुई है। श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार और अमावस्या को यहां विशेष पूजा का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दराज से भक्त पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में साफ-सफाई और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कमिटी द्वारा किए गए थे, जिससे भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
श्रावण अमावस्या का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार श्रावण मास की अमावस्या पितृ दोष निवारण और कालसर्प योग की शांति के लिए अत्यंत उपयुक्त मानी जाती है। इस दिन मां काली की आराधना करने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। दक्षिणेश्वरी काली मंदिर में आयोजित इस विशेष अनुष्ठान में शामिल होने के लिए सुबह से ही भक्तों की कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर माता से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
मंदिर कमिटी के प्रयासों की सराहना
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में मंदिर कमिटी के सचिव, कोषाध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों ने दिन-रात मेहनत की। प्रसाद निर्माण से लेकर भक्तों के बैठने, पेयजल और चिकित्सा व्यवस्था तक हर पहलू का ध्यान रखा गया। अध्यक्ष गलविंदर सिंह ग्वाले ने सभी सदस्यों, स्वयंसेवकों और प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भक्तों की आस्था ही मंदिर की असली पूंजी है। भविष्य में भी ऐसे आयोजन और भव्य स्तर पर किए जाएंगे।
जमशेदपुर का आध्यात्मिक केंद्र
जमशेदपुर औद्योगिक नगरी होने के साथ-साथ आध्यात्मिक दृष्टि से भी समृद्ध है। दक्षिणेश्वरी काली मंदिर की तरह ही शहर में कई प्राचीन मंदिर स्थित हैं, जो श्रावण मास में भक्ति का केंद्र बने रहते हैं। इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आधुनिकता की दौड़ में भी आस्था की जड़ें गहरी हैं। प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

