आईआरसीटीसी मामले में अदालत ने लालू, राबड़ी और तेजस्वी के खिलाफ आरोप तय किये
नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने कथित आईआरसीटीसी घोटाला मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद को ‘‘आपराधिक साजिश का सूत्रधार’’ करार देते हुए लालू प्रसाद, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उनके बेटे व राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के खिलाफ सोमवार को आरोप तय किए। इसके साथ ही बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले उनके खिलाफ मुकदमे की तैयारी शुरू हो गई है।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने यादव परिवार के तीन सदस्यों और 11 अन्य के खिलाफ 27 अक्टूबर से भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग और लोक सेवकों द्वारा आपराधिक कदाचार सहित विभिन्न अपराधों के लिए मामले की दिन-प्रतिदिन सुनवाई का मार्ग प्रशस्त किया।
न्यायाधीश ने 244 पृष्ठ के आदेश में मामले में “मिलीभगत’’ के पहलू को चिह्नित किया। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने यादव परिवार पर भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) की निविदाओं और अवैध भूमि हस्तांतरण में हेरफेर करने का आरोप लगाया था।
लालू प्रसाद यादव (77) पर रेल मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान कोचर बंधुओं- विजय कोचर, विनय कोचर (दोनों मेसर्स सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक, होटल चाणक्य, पटना के मालिक) और अन्य के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचने का आरोप है, ताकि रांची और पुरी में रेलवे के बीएनआर होटलों को उप-पट्टे पर देने के लिए ठेके देने में फर्म को अनुचित लाभ पहुंचाया जा सके।
सीबीआई के आरोपपत्र के अनुसार, बदले में कोचर ने कथित तौर पर पटना में एक प्रमुख भूखंड लालू प्रसाद के करीबी सहयोगी प्रेम चंद गुप्ता और उनके सहयोगियों द्वारा नियंत्रित एक कंपनी को बेच दिया और बाद में इस कंपनी को यादव के परिवार के सदस्यों ने अपने नियंत्रण में ले लिया और यह मूल्यवान संपत्ति मामूली कीमत पर उन्हें हस्तांतरित कर दी।
न्यायाधीश द्वारा आरोप पढ़े जाने के बाद लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी ने “निर्दोष” होने की दलील दी और मुकदमे का सामना करने की बात कही।
बिहार में दो चरणों में विधानसभा चुनाव 6 और 11 नवंबर को होंगे। लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों में से एक है और महागठबंधन का नेतृत्व करती है, जिसमें कांग्रेस भी एक घटक है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राजद पर तीखा हमला करते हुए दावा किया कि घोटाले, सरकारी ठेके देने में हेराफेरी और नौकरी का वादा कर लोगों की जमीन हड़पना राजद का शासन मॉडल है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने संवाददाता सम्मेलन में कहा,‘‘तेजस्वी यादव बिहार को बदलने जा रहे हैं, जिनके खिलाफ विशेष अदालत द्वारा 420 (धोखाधड़ी के लिए पूर्ववर्ती भारतीय दंड संहिता की धारा 420) का आरोप तय किया जा रहा है। 420 का अर्थ है धोखाधड़ी और इसकी सजा सात साल (कारावास) है।’’
राजद के राज्यसभा सदस्य मनोज कुमार झा ने दावा किया कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से प्रेरित ‘‘न्याय की विफलता’’ ने कानून के शासन को कमजोर कर दिया है और लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास खत्म कर दिया है।
आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया सबूत पाते हुए न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा, ‘‘इस प्रकार देखा जाए तो लालू प्रसाद यादव पर मेसर्स सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड को लाभ पहुंचाने के लिए निविदा प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित करने का गंभीर संदेह है। इससे उनके परिवार को आर्थिक लाभ हुआ और संभवतः राज्य/सरकारी खजाने को गलत तरीके से नुकसान हुआ, क्योंकि 2005 में कोचर बंधुओं द्वारा मेसर्स डीएमसीपीएल को बेची गई जमीन का मूल्यांकन कम किया गया था और जब निविदा बोली लगाने वाले को दी गई थी, तब भी बोलियों और उसके मूल्यांकन में हेरफेर किया गया था।’’
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अदालत ने कहा, ‘‘यह सामने आया है कि लालू प्रसाद आपराधिक षड्यंत्र के सूत्रधार थे, जिसमें कोचर बंधुओं, पी. सी. गुप्ता और सरला गुप्ता, संबंधित रेलवे अधिकारी और उनके अपने परिवार के सदस्य भी शामिल थे, ताकि कोचर बंधुओं के पक्ष में बहुत कम मूल्यांकन पर जमीन के बदले में ठेके दिया जा सके। इसलिए उन पर आईपीसी की धारा 420 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) के साथ धारा 13(1) (डी) (दो) और (तीन) के तहत दंडनीय अपराधों को करने के लिए षड्यंत्र का आरोप लगाया जा सकता है।’’
अदालत ने सभी आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी के तहत आपराधिक साजिश के आरोप तय किए।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मामला अब अभियोजन पक्ष के साक्ष्य के चरण में आगे बढ़ेगा, जो 27 अक्टूबर से 7 नवंबर तक रोजाना आधार पर औपचारिक गवाहों से जिरह के साथ शुरू होगा। सीबीआई सुनवाई की तारीखों के दौरान बुलाए जाने वाले गवाहों के बारे में आरोपियों को पहले से सूचित करेगी।’’
अदालत ने राजनीतिक साजिश के आरोपों को भी खारिज कर दिया और कहा कि “इस अभियोजन के पीछे राजनीतिक हित का आरोप दोधारी तलवार है।”
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘अगर एक तर्क यह है कि लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को 2014 के बाद केंद्र में आई नयी सरकार ने निशाना बनाया, तो उतना ही मजबूत दूसरा तर्क यह भी है कि पिछली सरकार ने भी उन्हें राजनीतिक हित के कारण क्लीन चिट दी थी। इसलिए, अदालत को कार्यवाही के इस चरण में इस तर्क को स्वीकार करने का कोई कारण नहीं दिखता… कि यह राजनीति से प्रेरित है।’’
‘‘मिलीभगत’’ के पहलू पर, अदालत ने प्रेम चंद गुप्ता की पत्नी सरला गुप्ता द्वारा मेसर्स डीएमसीपीएल के शेयरों को राबड़ी देवी और तेजस्वी प्रसाद यादव को कम मूल्य पर और संदिग्ध परिस्थितियों में बेचे जाने का उल्लेख किया, जिसमें गवाह के रूप में उद्धृत कई शेयरधारकों ने कथित तौर पर इन लेनदेन के बारे में अनभिज्ञता का दावा किया था।
लालू, राबड़ी और तेजस्वी के अलावा, अदालत ने मेसर्स लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी, विजय कोचर, विनय कोचर, सरला गुप्ता, प्रदीप कुमार गोयल, प्रेम चंद गुप्ता, राकेश सक्सेना, भूपेन्द्र कुमार अग्रवाल राकेश कुमार गोगिया, विनोद कुमार अस्थाना और मेसर्स सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ विभिन्न अपराधों के लिए आरोप तय किए।

