यूसील के लेखा विभाग में ओवरटाइम भुगतान को लेकर विवाद गहराया, कर्मचारियों ने लगाए पक्षपात के आरोप
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा: यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसील) के लेखा विभाग में ओवरटाइम भुगतान को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कर्मचारियों और ठेकेदारों से जुड़े सूत्रों ने आरोप लगाया है कि विभाग में ओवरटाइम आवंटन और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है, जिससे कर्मचारियों और ठेकेदारों के बीच असंतोष बढ़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पूर्व वित्त निदेशक के कार्यकाल में ओवरटाइम व्यवस्था लगभग बंद थी, लेकिन नए प्रबंधन के आने के बाद कुछ चुनिंदा कर्मचारियों को लगातार ओवरटाइम का लाभ दिए जाने की चर्चा है। आरोप यह भी है कि कई कर्मचारी निर्धारित समय से देर से कार्यालय पहुंचते हैं और ड्यूटी के दौरान निजी कार्यों के लिए बाहर जाते हैं, इसके बावजूद उन्हें ओवरटाइम दिया जा रहा है।
कर्मचारियों का कहना है कि वित्त निदेशक के निजी स्टाफ और कुछ क्लर्क स्तर के कर्मचारियों को लगातार ओवरटाइम का लाभ मिलने से अन्य कर्मचारियों में नाराजगी है। वहीं ठेकेदार संघ ने आरोप लगाया है कि सप्लायरों और ठेकेदारों के बिलों का भुगतान समय पर नहीं होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सफाई एवं अन्य ठेका कर्मियों के वेतन भुगतान में भी देरी की शिकायत सामने आई है।
सूत्रों का दावा है कि भुगतान में देरी के कारण हाल के दिनों में ठेका मजदूरों को हड़ताल का सहारा लेना पड़ा, जिससे कंपनी के कार्य प्रभावित हुए और औद्योगिक अशांति की स्थिति बनी।
ठेकेदार संघ के सदस्यों ने आरोप लगाया कि लेखा विभाग की कार्यशैली धीमी होने के कारण कई मामलों में दो से तीन महीने तक भुगतान लंबित रहता है।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि कथित पक्षपातपूर्ण रवैया बंद नहीं हुआ तो वे काम का बहिष्कार करने पर विचार कर सकते हैं। वहीं प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि ड्यूटी समय, उपस्थिति और ओवरटाइम रजिस्टर की नियमित समीक्षा होनी चाहिए।
हालांकि, इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए यूसील के लेखा विभाग के डीजीएम एवं विभागाध्यक्ष बी. श्रीकांत ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप निराधार और बेबुनियाद हैं।
फिलहाल मामले को लेकर कर्मचारियों, ठेकेदारों और प्रबंधन के बीच असंतोष का माहौल बना हुआ है। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रबंधन इन आरोपों की जांच कर स्थिति को स्पष्ट करता है या नहीं।

