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    Home » लोकतंत्र में सदन की गरिमा: हंगामे नहीं, संवाद और समाधान की जरूरत
    Breaking News Headlines उत्तर प्रदेश झारखंड राजनीति राष्ट्रीय संपादकीय

    लोकतंत्र में सदन की गरिमा: हंगामे नहीं, संवाद और समाधान की जरूरत

    Devanand SinghBy Devanand SinghAugust 4, 2026No Comments3 Mins Read
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    लोकतंत्र में सदन की गरिमा
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    लेखक: देवानंद सिंह

    संसदीय लोकतंत्र में विधानसभाओं की भूमिका कानून निर्माण और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करना है, लेकिन हाल के दिनों में हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित होने से जनहित के मुद्दे पीछे छूट रहे हैं। यह स्थिति न केवल संसदीय परंपराओं का अपमान है, बल्कि मतदाताओं के विश्वास को भी ठेस पहुंचाती है।

    उत्तर प्रदेश और झारखंड विधानसभा में गतिरोध

    उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में जिस तरह विपक्ष के हंगामे के बीच कार्यवाही बाधित हुई और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे असंवैधानिक तथा शर्मनाक बताया, उसने एक बार फिर लोकतंत्र में सदन की गरिमा पर बहस छेड़ दी है। दूसरी ओर, झारखंड विधानसभा के आगामी सत्र को लेकर भी ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि JPSC, JSSC और CGL परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने होंगे। ऐसे में यह आशंका स्वाभाविक है कि कहीं झारखंड विधानसभा भी हंगामे की भेंट न चढ़ जाए।

    विपक्ष और सरकार की जिम्मेदारी

    लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सरकार से जवाब मांगने और जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाने की होती है। वहीं सरकार का दायित्व है कि वह हर सवाल का तथ्यात्मक और पारदर्शी उत्तर दे। लेकिन जब सदन में बहस की जगह नारेबाजी, वेल में आना और कार्यवाही बाधित करना प्राथमिकता बन जाए, तो सबसे बड़ा नुकसान जनता का होता है। कानून निर्माण, विकास योजनाएं, बजट, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अहम विषय चर्चा से वंचित रह जाते हैं।

    झारखंड में युवाओं का भविष्य दांव पर

    झारखंड में आज सबसे बड़ा मुद्दा युवाओं का भविष्य है। भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दे रहा है। सरकार जांच की बात कर रही है, विपक्ष CBI जांच की मांग कर रहा है और छात्र निष्पक्ष कार्रवाई चाहते हैं। इस पूरे मामले का सबसे उचित मंच विधानसभा ही है, जहां सरकार जवाब दे और विपक्ष तथ्यों के आधार पर सवाल पूछे। यदि वहां भी केवल हंगामा हुआ, तो समाधान की उम्मीद और कमजोर होगी।

    लोकतंत्र में सदन की गरिमा बहाल करने के उपाय

    उत्तर प्रदेश की घटना से सभी दलों को सीख लेने की आवश्यकता है। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सदन की गरिमा सर्वोपरि होती है। विरोध का अधिकार लोकतंत्र की आत्मा है, लेकिन वह विरोध नियमों और संसदीय परंपराओं के भीतर रहकर अधिक प्रभावी बनता है। इसी प्रकार सरकार को भी विपक्ष के सवालों से बचने के बजाय खुलकर जवाब देना चाहिए। पारदर्शिता ही विश्वास का आधार है।

    जनता चाहती है परिणाम, आरोप-प्रत्यारोप नहीं

    आज जनता राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अधिक परिणाम चाहती है। झारखंड के युवा रोजगार चाहते हैं, किसान बेहतर व्यवस्था चाहते हैं और आम नागरिक विकास के मुद्दों पर चर्चा देखना चाहता है। यदि विधानसभा केवल शोर-शराबे का मंच बन गई, तो लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण संस्था अपनी मूल भूमिका से भटक जाएगी।

    संवाद और जवाबदेही से मजबूत होगा लोकतंत्र

    झारखंड और उत्तर प्रदेश, दोनों ही घटनाक्रम एक स्पष्ट संदेश देते हैं कि लोकतंत्र की मजबूती टकराव से नहीं, बल्कि संवाद, जवाबदेही और सार्थक बहस से होती है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को यह समझना होगा कि जनता ने उन्हें हंगामा करने के लिए नहीं, बल्कि समस्याओं का समाधान निकालने के लिए चुना है। सदन चलेगा तो लोकतंत्र मजबूत होगा, और लोकतंत्र मजबूत होगा तो जनता का विश्वास भी कायम रहेगा।

    • मुख्य बिंदु: विधानसभाओं में हंगामे से जनहित के मुद्दे उपेक्षित होते हैं।
    • समाधान: विपक्ष तथ्यात्मक सवाल पूछे, सरकार पारदर्शी जवाब दे।
    • प्राथमिकता: युवाओं के रोजगार, किसानों की समस्या, विकास पर चर्चा हो।

    अधिक जानकारी के लिए भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट देखें।

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