13 साल बाद भी भर नहीं पाया राज कॉम का घाव”
यूरेनियम नगरी का सबसे बड़ा आर्थिक जख्म फिर हरा
राष्ट्र संवाद जादूगोड़ा
जादूगोड़ा
देश के मानचित्र पर जादूगोड़ा की पहचान भले “यूरेनियम नगरी” की हो, लेकिन इस छोटे से औद्योगिक शहर ने एक ऐसा आर्थिक अपराध देखा जिसकी टीस 13 साल बाद भी हजारों दिलों में जिंदा है।
राज कॉम चिटफंड घोटाला। भरोसे के नाम पर शुरू हुआ ये खेल आज भी लोगों की नींद उड़ाए हुए है। मामला एक बार फिर गरमा गया है। पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की पुत्री और सामाजिक कार्यकर्ता दुखनी सोरेन ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर पीड़ितों को न्याय दिलाने और पूरे मामले की ED से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जल्द ही इसके लिए बड़ा आंदोलन होगा।
2008 में खुला था “भरोसे का खेल”
कहानी के केंद्र में जादूगोड़ा के दो भाई थे – पूर्व यूसील कर्मी कमल सिंह और उसका छोटा भाई दीपक सिंह।
“1 लाख पर 5 हजार महीना” – यही राज कॉम की सबसे बड़ी ताकत थी। बैंक से कई गुना ज्यादा रिटर्न का लालच। शुरुआत में जिसको पैसा मिला, उसने रिश्तेदार को बताया। रिश्तेदार ने पड़ोसी को। एजेंटों के नेटवर्क से पैसा घर-घर पहुंच गया। अपराधी को हर घर जाने की जरूरत ही नहीं पड़ी।
पीड़ित की जुबानी
स्थानीय कारपेंटर सत्यनारायण मिस्त्री ने बताया था – “जीवनभर की कमाई करीब 10 लाख रुपये लगा दिए। कारोबारी के लिए आंकड़ा था, हमारे लिए घर, बेटी की शादी और इलाज का सपना था।”
सितंबर 2013: टूटा भरोसा, डूबी जिंदगी
जिन्हें उम्मीद थी पैसा डबल होगा, वे अचानक लाइन में लग गए। भुगतान बंद। एजेंट गायब। शिकायतें बढ़ीं तो FIR हुई। धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश की धाराएं लगीं। जिस राज कॉम को मुनाफे का पर्याय माना जाता था, वही नाम घोटाले का पर्याय बन गया।
रकम कितनी? कोई 1000 करोड़ कह रहा, कोई 1500 करोड़, कोई 1800 करोड़। असली आंकड़ा आज भी रहस्य है। लेकिन पीड़ितों के लिए हर रुपया बेटी की शादी, बच्चों की पढ़ाई और बुढ़ापे का सहारा था।
2015: टर्निंग पॉइंट और फिर सन्नाटा
पुलिस ने कमल सिंह को असम के दिसपुर से गिरफ्तार किया। उसे जमशेदपुर लाकर जादूगोड़ा में पूछताछ हुई। पीड़ितों को लगा अब पैसा मिलेगा।
बॉक्स १
जांच में परतें खुलती गईं –
1. यूसिल अधिकारी मिहिर मौलिक की गिरफ्तारी
2. 2021 में यूसील कर्मी अमूल्य पात्रो की गिरफ्तारी। पुलिस ने इसे राज कॉम का प्रमुख एजेंट बताया।
2015 में CBI जांच की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन भी हुआ।
सबसे बड़ा सवाल: दीपक सिंह कहां है?
कमल तो पकड़ा गया, लेकिन छोटा भाई दीपक सिंह 13 साल से फरार है।
2023 में दोनों के खिलाफ इश्तेहार। 2024 में अदालत के आदेश पर कमल के पुराने घर पर इश्तेहार चस्पा। कानूनी प्रक्रिया चल रही है, लेकिन दीपक की गिरफ्तारी आज भी जादूगोड़ा की सबसे बड़ी पहेली है।
13 साल बाद भी जिंदा है घाव
राज कॉम सिर्फ रुपये की ठगी नहीं थी। ये “भविष्य की ठगी” थी।
जिसने 2013 में बेटी की शादी के लिए पैसा लगाया, 2026 में भी वो उसी नुकसान के साथ है। खाली बैंक खाते, पुरानी रसीदें, अधूरे मकान, रुकी शादियां – ये वो पन्ने हैं जो FIR में दर्ज नहीं होते।
भरोसा सबसे महंगा निवेश
राज कॉम ने सिखाया – कोई भी निवेश सिर्फ इसलिए सुरक्षित नहीं कि बताने वाला अपना है।
निवेश से पहले 4 बातें जरूर चेक करें: कंपनी का रजिस्ट्रेशन, नियामक की अनुमति, रिटर्न का स्रोत, पैसा निकालने की शर्त। “निश्चित और ज्यादा मुनाफे” का वादा हो तो 10 बार सोचें।
बॉक्स २
आज भी अधूरे 7 सवाल
1. सभी पीड़ितों का पैसा वापस कब मिलेगा?
2. घोटाले की असली रकम कितनी थी?
3. पैसा किन खातों और संपत्तियों में गया? कितनी संपत्ति कुर्क हुई?
4. कितने एजेंट शामिल थे? कितनी गिरफ्तारी हुई?
5. पैसा दूसरे राज्य/विदेश गया क्या?
6. दीपक सिंह कब गिरफ्तार होगा?
7. ED जांच की मांग पर सरकार क्या करेगी?
कमल की गिरफ्तारी और इश्तेहार ने उम्मीद जिंदा रखी है। लेकिन जब तक दीपक नहीं पकड़ा जाता और पैसे का हिसाब नहीं मिलता, जादूगोड़ा का ये जख्म नहीं भरेगा।

