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    Home » जानकी मंदिर में प्रवेश कर मन को मिल जाती है शांति,मंदिर के वातावर्ण से माँ के आस-पास होने का होता है एहसास
    बिहार

    जानकी मंदिर में प्रवेश कर मन को मिल जाती है शांति,मंदिर के वातावर्ण से माँ के आस-पास होने का होता है एहसास

    Begusarai SamvadBy Begusarai SamvadOctober 17, 2021No Comments2 Mins Read
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    रामशंकर कुमार

    सीतामढ़ी ( बिहार )जानकी मंदिर,सीतामढ़ी : सीतामढी रेलवे स्टेशन से ठीक 2 किलोमीटर की दूरी पर माँ जानकी जी का मंदिर है मंदिर में भगवान श्रीराम के साथ माँ सीता और लक्ष्मण की मूर्तियों को स्थापित की गई है मंदिर में भगवान के मूर्तियों के स्थापित होने के बाद आस-पास का वातावरण स्वक्ष लगने लगा है ।जानकी मंदिर के अंदर प्रवेश करते ही मन को शांति मिल जाती है मन अस्थिर और शांति हो जाते हैं आस-पास के वातारण से भगवान के होने का एहसास भी होता है ।

    जानकी मंदिर ने सीतामढ़ी को बनाया है प्रसिद्ध

    सीतामढ़ी नगर के पश्चिमी छोर पर अवस्थित है माँ जानकी मंदिर त्रेतायुगीन आख्यानों में दर्ज यह हिंदू तीर्थ-स्थल बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है।और माँ सीता जी के जन्म के कारण इस नगर का नाम पहले सीतामड़ई, फिर सीतामही और कालांतर में सीतामढ़ी पड़ा। यह शहर लक्षमना (वर्तमान में लखनदेई) नदी के तट पर अवस्थित है। रामायण काल में यह मिथिला राज्य का एक महत्वपूर्ण अंग था। १९०८ ईस्वी में यह मुजफ्फरपुर जिला का हिस्सा बना। स्वतंत्रता के पश्चात 1972 में मुजफ्फरपुर से अलग होकर यह जिला स्वतंत्र बना। बिहार के उत्तरी गंगा के मैदान में स्थित यह जिला नेपाल की सीमा पर होने के कारण संवेदनशील है। बज्जिका यहाँ की बोली है लेकिन हिंदी और उर्दू राजकाज़ की भाषा और शिक्षा का माध्यम है। यहाँ की स्थानीय संस्कृति, रामायणकालीन परंपरा तथा धार्मिकता नेपाल के तराई प्रदेश तथा मिथिला के समान है
    वर्तमान समय में यह तिरहुत कमिश्नरी के अंतर्गत बिहार राज्य का एक जिला मुख्यालय और प्रमुख पर्यटन स्थल है ।

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