कुलामारा में पुल निर्माण ठप, ग्रामीणों में आक्रोश सड़क कार्य रोका
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा थाना क्षेत्र के माटीगोड़ा पंचायत के कुलामारा गांव में पुल निर्माण कार्य वर्षों से अधर में लटका हुआ है, जिससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। मंगलवार को ग्रामीणों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया और स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि शीघ्र पुल निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं किया गया, तो ग्रामीण कुछ कड़ा कदम उठाने को मुजबूर होंगे।
ग्रामीणों ने दीगड़ी मोड़ से बांकाई तक बन रहे 10 किलोमीटर लंबे सड़क निर्माण कार्य को भी रोक दिया है। उनका कहना है कि जब तक पुल निर्माण शुरू नहीं होगा, तब तक सड़क का काम भी नहीं होने देंगे।

ब्रिटिश काल का जर्जर पुल हर वर्ष बह जाता है
ग्रामीणों ने बताया कि कुलामारा का यह पुल ब्रिटिश काल में बना था और हर वर्ष बारिश के दौरान डूब जाता है या बह जाता है। मजबूरी में ग्रामीण श्रमदान कर लकड़ी का अस्थायी पुल बनाते हैं ताकि मजदूर, मरीज और स्कूली बच्चों का आवागमन किसी तरह संभव हो सके। बारिश के दिनों में यह रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है और करीब दस गांवों का संपर्क टूट जाता है।
ग्रामीणों ने उठाई आवाज़
स्थानीय निवासी व पूर्व पंचायत समिति सदस्य अजीत भूमिज ने कहा कि पहले सांसद विद्युत वरण महतो और पूर्व मंत्री स्व. रामदास सोरेन द्वारा इस सड़क का शिलान्यास किया गया था। इसमें पुल निर्माण भी शामिल था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
उन्होंने कहा कुलामारा पुल का डिजाइन पहले छोटा था, जो हर साल जलमग्न हो जाता था। बड़े पुल का प्रस्ताव रांची भेजा गया, लेकिन वर्षों बाद भी स्वीकृति नहीं मिली। ठेकेदार का कहना है कि प्रस्ताव रीवाइज के लिए रांची गया है। जब तक रीवाइज पास नहीं होगा, निर्माण शुरू नहीं किया जा सकता।
ग्रामीण बागुन पूर्ति, विजय सिंह, मंगल पूर्ति, दुर्गा मुर्मू, दिकू पूर्ति, संदिर सिंह, पुरनो कर्मकार, साजित सिंह सहित कई अन्य ने कहा कि यह पुल दस गांवों को जोड़ने वाला एकमात्र संपर्क मार्ग है। हल्की बारिश में भी पुल जलमग्न हो जाता है, जबकि तेज बारिश में बह जाता है।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष में तीन बार लकड़ी का अस्थायी पुल बनाना पड़ता है। फिलहाल सड़क निर्माण कार्य कर रही साईं कंस्ट्रक्शन कंपनी के ठेकेदार ने अस्थायी तौर पर बोल्डर डालकर एक रास्ता बनाया है। जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहन आ-जा रहे हैं।
जब तक स्थायी पुल नहीं, तब तक सड़क नहीं
ग्रामीणों ने कहा कि वे अब सिर्फ आश्वासन नहीं काम चाहते हैं। जब तक पक्के पुल का निर्माण नहीं होगा, तब तक सड़क का काम आगे नहीं बढ़ने देंगे।
उन्होंने बताया कि कुछ माह पूर्व खड़िया बस्ती में जमशेदपुर के उपायुक्त से भी पुल निर्माण की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इस मामले में आरईओ के सहायक कार्यपालक अभियंता राजेश कुमार ने बताया कि कुलामारा पुल का प्रस्ताव पुनरीक्षित प्राक्कलन (रीवाइज्ड एस्टीमेट) के रूप में मुख्य अभियंता कार्यालय में भेजा गया है। हाल ही में चीफ इंजीनियर की टीम ने स्थल निरीक्षण भी किया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी
ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। वर्षों से जर्जर पुल के कारण दस गांवों की जीवनरेखा बारिश में ठप हो जाती है। प्रशासन की आश्वासन-प्रधान नीति पर अब सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है अब वादे नहीं काम चाहिए।

