बिहार लोक सेवा आयोग में दिव्यांग आरक्षण घोटाला!
दिव्यांग अभ्यर्थियों ने राज्यपाल को पत्र लिखकर मामले की जांच की मांग की
दिव्यांग आरक्षण घोटाला किया बिहार लोक सेवा आयोग ने! सुनील कमल पटना बिहार लोक सेवा आयोग ने अपने विज्ञापन संख्या:53/2014 के तहत इतिहास विषय में सहायक प्राचार्य की नियुक्ति में दिव्यांग आरक्षण घोटाला किया है।आयोग ने इतिहास विषय में आठ दिव्यांग के सीटों पर सात दिव्यांग सामान्य वर्ग से हीं ले लिए हैं सिर्फ एक पद ओबीसी को दिया गया है।अनुसूचित जाति,जनजाति,अत्यन्त पिछड़ा वर्ग के एक भी दिव्यांग अभ्यर्थी को नहीं लिया गया है।ज्यादातर दिव्यांग अभ्यर्थी बाहर के राज्यों के हैं जबकि नियमतः बिहार राज्य के दिव्यांगजनो को ही दिव्यांगता के आरक्षण का फायदा मिलना चाहिए था।बिहार राज्य के इतिहास विषय के असफल कर दिए गए दिव्यांग अभ्यर्थियों ने बताया कि आयोग ने इतिहास विषय के दो दो रिजल्ट निकालें उन दोनों रिजल्ट में कहीं पर भी एससी दिव्यांग को सफल नहीं दिखाया गया और ना ही बताया गया सिर्फ दिव्यांग अभ्यर्थियों को उनके आर टी आई के माध्यम से अनुसूचित जाति एवं अंध दिव्यांग को एक पद देने का जिक्र किया गया है वह भी बगैर पद घटाये।अब सवाल यह है कि आयोग ने आठ सीटों के बजाए नौ सीटों पर आरक्षण कैसे दे दिए? मतलब की आयोग अपने को बचाने के लिए चुपके से सीट को 9,10,11,12 और भी कर सकता है।बिहार के दिव्यांग अभ्यर्थियों ने कुलाधिपति सह राज्यपाल बिहार को पत्र लिख कर उच्च स्तरीय मेडिकल टीम के द्वारा सभी चयनित दिव्यांगों की दिव्यांगता की जांच करवाने की मांग की है।ये चयनित दिव्यांग किस राज्य के हैं? उनके विकलांगता का प्रतिशत और उन्होंने अपना दिव्यांगता प्रमाण पत्र आयोग में कब जमा किया है ? यह सभी बात का पता किया जाये।आयोग के हरकत से विकलांगता आरक्षण घोटाले की पूरी संभावना नजर आ रही है अतः इतिहास विषय के नियुक्ति की जांच शीघ्रता शीघ्र निगरानी/सीबीआई से तुरन्त करवाई जाये एवं योग्य दिव्यांग जो बिहार के अभ्यर्थी हैं उनका चयन किया जाये।आयोग ने 25 मई 2019 एवं 21 अगस्त 2019 के रिजल्ट को काफी विवादित और दिव्यांग आरक्षण घोटाला की शक्ल में तब्दील कर दिया है।

