लगातार पांचवें दिन मंझौल मे ऑटो यूनियन के सदस्यों ने गाड़ी खड़ी कर जताया विरोध
ब्यूरो चन्दन शर्मा की रिपोर्ट
चेरियाबरियारपुर,बेगूसराय ।बस वाहन संघ एवं ऑटो यूनियन चालक संघ मे टकराव के बीच लगातार पांचवें दिन भी क्षेत्र में ऑटो रिक्शा का परिचालन बंद रहा. जिसके फलस्वरूप राहगीरों को भारी फजीहत झेलनी पड़ी. बताया जाता है ऑटो रिक्शा के लिए परिवहन विभाग के द्वारा स्टैंड निर्धारित नहीं की गई है. फलतः विगत कई वर्षों से बस स्टैंड से ही ऑटो रिक्शा का भी परिचालन होते चली आ रही है. इसके लिए विधिवत ऑटो चालक स्टैंड का बैरियर राशि भी जमा करते आ रहे हैं. परंतु अब यह बात बस वाहन संघ के अधिकारियों को कुबूल नहीं है. चूंकि बस वाहन संघ के बैनर तले भी परिवहन विभाग कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन के माध्यम से ऑटो चालकों द्वारा अवैध तरीके से बस स्टैंड का उपयोग करने का आरोप लगाते हुए लड़ाई को आर-पार के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है. ऑटो यूनियन चालक संघ मंझौल के सदस्य करण सिंह, सुनील रजक, घनश्याम पासवान आदि ने बताया अधिकारियों के द्वारा मामले मे रूचि लेकर मध्यस्थता नहीं करने के कारण नतीजा नहीं निकल पा रहा है. जबकि बस वाहन संघ के अधिकारियों के द्वारा बड़ी मछली का छोटी मछली को खा जाने की रिवायत पर कार्य किया जा रहा है. जिससे ऑटो चालकों की मुश्किलें बढ़ गई है.
मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना पर गहरा रहा संकट के बादल
ऑटो यूनियन के सदस्यों ने बताया मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत पूरे जिले में लगभग दो हजार लोगों को ऑटो रिक्शा उपलब्ध कराया गया है. ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में जहां एक ओर यातायात की सुविधा को सुगम बनाया जा सके. वहीं दूसरी ओर बेरोजगार लोगों को रोजगार मिल सके. इसके लिए विधिवत 25 किलोमीटर का परमिट परिवहन विभाग द्वारा जारी किया गया है. परंतु मंझौल से बखरी, बगरस, गढ़पुरा, बेगूसराय एवं खोदाबंदपुर के मेन रूट जो 25 किलोमीटर के दायरे में आता है. इन सभी रूटों मे ऑटो चालकों के साथ बस वाहन संघ के सदस्यों द्वारा मारपीट, गाली- गलौज एवं अभद्रतापूर्ण व्यवहार कर सवारी उतारकर बस मे चढ़ा लिया जाता है. बस वाहन संघ की दबंगई के कारण बैंक का किस्त गिर गया है. फाइनेंसर गाड़ी खींचकर ले जा रहे हैं. जिसके फलस्वरूप जहां ऑटो चालकों की रोजगार छीन रही है. वहीं सरकार के महत्वपूर्ण योजना पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं. हालांकि ऑटो यूनियन के सदस्य रोजी-रोटी की दुहाई देकर परिवहन विभाग सहित जिला प्रशासन को मामले की नजाकत समझते हुए अविलंब हस्तक्षेप कर उक्त टकराव समाप्त कराने की मांग लिखित रूप से की है. परंतु परिवहन विभाग की उदासीनता के कारण पांचवें दिन भी उक्त टकराव पर विराम नहीं लग सका है.
बसों मे सरकारी आदेश को ठेंगा दिखा अवैध तरीक़े से होती है भाड़ा वसूली
वैश्विक महामारी कोरोना के कारण जिला प्रशासन द्वारा भाड़े का निर्धारण कर गाइडलाइंस जारी किया गया है. परंतु प्रायः बस चालकों द्वारा नियम के विरुद्ध ओवरलोड सवारी को चढ़ाकर सिर्फ़ भाड़े की वसूली होती रही है. विश्वस्त सूत्रों की मानें तो वर्तमान में परिवहन विभाग द्वारा मंझौल से बेगूसराय का किराया ऑटो का 29 रूपये एवं बस का 18 रूपये निर्धारित किया गया है. लेकिन बस कंडक्टर के द्वारा दबंगई दिखाकर अब भी प्रति सवारी 30 रूपये की दर से वसूल की जा रही है. जबकि कोरोना गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ाते हुए बस के उपर एवं नीचे सीट से दोगूनी सवारी ढोया जाता है. यहां तक की ऑटो चालकों के साथ भी मारपीट कर सवारी छीन लिया जाता है. वहीं ऑटो यूनियन के सदस्यों ने कहा जिला प्रशासन द्वारा ऑटो चालकों को न्याय नहीं मिला तो बाध्य होकर आंदोलन का रास्ता एख्तियार करना पड़ेगा.

