जमशेदपुर की हवा ज़हरीली
कोल्हान में 50 हजार मरीज प्रभावित, दवाओं पर सालाना 50 करोड़ खर्च
दोषी कौन? सरकार चुप, नेता मौन… आमजन की सांसें संकट में
देवानंद सिंह
जमशेदपुर समेत पूरे कोल्हान की हवा दिनों-दिन जहरीली होती जा रही है। औद्योगिक उत्सर्जन, बढ़ते वाहन, निर्माण कार्यों की धूल और घटती हरियाली के कारण वायु प्रदूषण का स्तर लगातार खतरनाक सीमा पार कर रहा है। स्थिति यह है कि बीते एक वर्ष में करीब 50 हजार लोग सांस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का शिकार हुए हैं। अस्पतालों में भीड़ बढ़ रही है और शहर भर में इनहेलर, नेबुलाइज़र, एंटी-एलर्जिक दवाओं की खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच चुकी है। अनुमान है कि कोल्हान में इन रोगों पर सालाना 50 करोड़ रुपये से अधिक दवाओं पर खर्च हो रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ते PM2.5 और PM10 कण फेफड़ों की क्षमता को तेजी से कम कर रहे हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों में गंभीर असर दिख रहा है। डॉक्टरों के अनुसार जमशेदपुर के कई औद्योगिक इलाकों में प्रदूषण का स्तर राष्ट्रीय मानक से कई गुना अधिक पाया गया है।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि इस प्रदूषण का जिम्मेदार कौन? औद्योगिक इकाइयों की ढीली मॉनिटरिंग, वाहन प्रदूषण नियंत्रण की औपचारिकता, निर्माण स्थलों पर धूल रोकथाम की कमी और प्रशासन की निष्क्रियता इस संकट को और गहरा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई कागजों में दर्ज है, जबकि शहर की हवा बदस्तूर खतरनाक बनी हुई है।
स्थिति पर सरकार और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी लोगों की परेशानी और बढ़ा रही है। न कोई ठोस कार्ययोजना, न मॉनिटरिंग रिपोर्ट, न ही उद्योगों पर कड़े दंड की पहल। दूसरी ओर आम लोग हर दिन जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं और चिकित्सा पर अतिरिक्त खर्च उठाने के लिए विवश।
कोल्हान के पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि तुरंत सख्त उपाय नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में दमा, फेफड़ों की बीमारी और हृदय संबंधी रोगों में भारी वृद्धि हो सकती है। विशेषज्ञों ने शहर में 24×7 रियल-टाइम एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग, औद्योगिक प्लांटों पर कड़े नियम, ट्रैफिक प्रबंधन, हरियाली बढ़ाने और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण को तत्काल लागू करने की मांग की है।
फिलहाल बड़ा सवाल जनता के बीच गूंज रहा है जब प्रदूषण से लोग बीमार पड़ रहे हैं और अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ रहा है, तब सरकार और नेता आखिर चुप क्यों हैं?

